भास्कर एक्सपर्ट सिगरेट पीना फेफड़ों और हृदय के लिए ही नहीं, बल्कि माता-पिता बनने के सपने के लिए भी खतरा बन रहा है। हाल के वर्षों में इनफर्टिलिटी क्लिनिकों में आने वाले कई युवा दंपतियों की जांच में स्मोकिंग बड़ा कारण बनकर सामने आया है। विशेषज्ञ बताते हैं-सिगरेट में मौजूद निकोटिन और अन्य विषैले केमिकल शरीर का हार्मोन संतुलन बिगाड़ते हैं। इससे पुरुषों में स्पर्म काउंट और गुणवत्ता घट सकती है। महिलाओं में अंडाणु की गुणवत्ता प्रभावित होती है और गर्भधारण की संभावना कम हो जाती है। वहीं धूम्रपान करने वाले व्यक्ति के आसपास रहने वाले परिवार के सदस्यों में भी कैंसर और सांस संबंधी रोगों का खतरा बढ़ सकता है। स्मोकिंग से स्पर्म डीएनए डैमेज होगा धूम्रपान पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर सीधा असर डालता है। इससे शुक्राणुओं की गुणवत्ता और उनकी सक्रियता कमजोर हो जाती है। गर्भधारण की संभावना भी कम हो जाती है। महिला धूम्रपान करती है या गर्भावस्था में धुएं के संपर्क में रहती है तो इसका असर गर्भ में पल रहे बच्चे पर पड़ सकता है। इससे बच्चे के विकास की गति धीमी हो सकती है। लंबे समय तक धूम्रपान करने से महिलाओं के अंडाशय की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। इससे शरीर में हार्मोन असंतुलन की स्थिति बन सकती है। इसके कारण गर्भधारण में देरी हो सकती है। कुछ मामलों में गर्भपात या समय से पहले प्रसव का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए महिलाओं के लिए धूम्रपान से दूर रहना जरूरी है। धूम्रपान करने वाले के आसपास रहने वाले लोग भी प्रभावित होते हैं। दूसरे के धुएं के संपर्क में रहने से भी महिलाओं की प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है। फेफड़ों के कैंसर का सबसे बड़ा कारण, किडनी को भी नुकसान डॉ. हिमांशु रॉय, वरीय बांझपन रोग विशेषज्ञ वरीय फिजिशियन डॉ राजीव रंजन के अनुसार धूम्रपान फेफड़ों के कैंसर का सबसे बड़ा कारण है। 80-90 प्रतिशत मामलों में मुख्य वजह यही होती है। धूम्रपान से खून में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है। इससे मस्तिष्क तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाता। इसके कारण चक्कर आना, घबराहट, बेचैनी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। धूम्रपान से शरीर की खून की नलियां पतली होने लगती हैं। इससे किडनी तक रक्त की आपूर्ति कम हो जाती है।
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