धर्मशाला-पालमपुर मुख्य मार्ग पर स्थित वह स्थान, जो कभी शहर की खूबसूरती बढ़ाने के लिए ‘सेल्फी पॉइंट’ के रूप में चर्चा में आया था, अब अवैध कब्जों का केंद्र बन गया है। स्मार्ट सिटी के दावों और नगर निगम की आपत्तियों के बीच यह स्थल अब यातायात के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। मार्च 2024 में जिस जगह को असुरक्षित बताया गया था, वहां अब स्थायी रूप से सजी रेहड़ियों ने प्रशासन की मुस्तैदी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सियासी खींचतान से शुरू हुआ था विवाद यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ था जब मेयर नीनू शर्मा ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बनाए जा रहे इस सेल्फी पॉइंट का कड़ा विरोध किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि विधायक सुधीर शर्मा के कहने पर वन विभाग की अनुमति के बिना वन भूमि पर इसका निर्माण किया गया। मेयर ने इसे ‘दुर्घटना संभावित’ (Accident Prone) क्षेत्र करार दिया था, जिसके बाद भारी विरोध के चलते पर्यटन विभाग को यह सेल्फी पॉइंट वहां से हटाना पड़ा था। पुलिस की कार्रवाई का नहीं हो रहा असर
अवैध कब्जों को हटाने के लिए पुलिस समय-समय पर अभियान चलाती है और इन विक्रेताओं को वहां से खदेड़ती है। लेकिन यह कार्रवाई महज एक रस्म अदायगी बनकर रह गई है। पुलिस की गाड़ी के जाते ही ये रेहड़ी-फड़ी वाले फिर से उसी स्थान पर अपनी दुकानें सजा लेते हैं। प्रशासन की ढिलाई और इन विक्रेताओं की जिद के कारण यह मुख्य मार्ग अब अतिक्रमण की चपेट में है। प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल सवाल यह उठता है कि यदि सेल्फी पॉइंट ‘दुर्घटना संभावित’ होने के कारण हटाया गया था, तो वहां अवैध रेहड़ियों को कैसे पनपने दिया जा रहा है? क्या प्रशासन किसी अनहोनी के बाद ही जागेगा? पर्यटन नगरी की छवि को बचाने और यातायात को सुचारू बनाने के लिए अब एक ठोस नीति और स्थायी समाधान की सख्त दरकार है। तीखे मोड़ पर बढ़ता मौत का खतरा जिस स्थान से सेल्फी पॉइंट हटाया गया था, वहां अब चार अवैध रेहड़ियों ने कब्जा जमा लिया है। इनमें से तीन नारियल विक्रेता लंबे समय से स्थायी रूप से सड़क किनारे जमे हुए हैं। गौरतलब है कि यह सड़क मार्ग काफी संकरा है और यहां एक बहुत तीखा मोड़ है। इन रेहड़ियों पर सामान खरीदने के लिए जब वाहन रुकते हैं, तो पीछे से आने वाले तेज रफ्तार वाहनों के लिए स्थिति जानलेवा बन जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन एक बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है। वेंडर जोन की कमी: समस्या की असली जड़
धर्मशाला स्मार्ट सिटी में व्यवस्थित ‘वेंडर जोन’ का अभाव इस समस्या का मुख्य कारण माना जा रहा है। रेहड़ी-फड़ी वालों का तर्क है कि उनके पास रोजी-रोटी कमाने के लिए कोई और व्यवस्थित स्थान नहीं है। इसी मजबूरी में वे सड़कों के किनारे और पर्यटन स्थलों पर कब्जा कर रहे हैं। इससे न केवल शहर का यातायात बाधित हो रहा है, बल्कि धर्मशाला की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन छवि को भी भारी नुकसान पहुँच रहा है।
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