पंजाब सरकार ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को बढ़ावा देने के लिए सरकारी टेंडर प्रक्रिया में बदलाव करने का फैसला लिया है। अब छोटी और नई कंपनियां भी टर्नओवर और अनुभव संबंधी नियमों में ढील के साथ टेंडर में हिस्सा ले सकेंगी। इस कदम से सरकारी टेंडरों में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और कुछ बड़ी कंपनियों का एकाधिकार टूटेगा।
पंजाब में निर्माण, आपूर्ति, विभिन्न सेवाओं और ईपीसी (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन) से जुड़े टेंडर सबसे अधिक होते हैं। वर्तमान में टेंडर के लिए कंपनियों का टर्नओवर करोड़ों में होना और संबंधित क्षेत्र में कई वर्षों का अनुभव होना अनिवार्य है। यही कारण था कि अधिकतर टेंडर बड़ी कंपनियों को ही मिलते थे और कुछ मामलों में आपसी मिलीभगत की आशंका भी रहती थी।
एमएसएमई को मिलेगा अवसर
सरकार के अनुसार नई और छोटी कंपनियां अब इस क्षेत्र में प्रवेश कर सकेंगी, जिससे उनका अनुभव और टर्नओवर बढ़ेगा। इससे प्रतिस्पर्धा में सुधार होगा और टेंडर प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
गुणवत्ता पर कोई समझौता नहीं: मान
सरकार ने एमएसएमई को लाभ देने के लिए टर्नओवर व अनुभव संबंधी नियमों में ढील देने का निर्णय लिया है। नई व छोटी कंपनी जब इस फील्ड में आएगी तभी तो उनका अनुभव व टर्नओवर बढ़ेगा। इससे प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी और कंपनियों का एकाधिकार भी खत्म होगा। प्रोडेक्ट की गुणवत्ता के मामले में हम बिल्कुल भी समझौता नहीं करेंगे। कंपनी के हर उत्पाद को क्वालिटी मानकों पर खरा उतरा होगा। -भगवंत मान, मुख्यमंत्री, पंजाब
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