शिक्षा विभाग ने यह भी साफ कर दिया है कि डिफॉल्टर विद्यालयों के खिलाफ चरणबद्ध तरीके से सख्त कदम उठाए जाएंगे, जिसमें मान्यता रद्द करने, यू-डायस कोड निरस्त करने और सभी सरकारी योजनाओं से बाहर करने जैसी कार्रवाई शामिल है.
शिक्षा विभाग के अनुसार शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 12(1)(सी) के तहत निजी विद्यालयों में कुल स्वीकृत सीटों का 25 प्रतिशत हिस्सा आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित करना अनिवार्य है. शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए इन आरक्षित सीटों की संख्या, विद्यालय की सेवन क्षमता, कक्षावार विवरण, आधारभूत संरचना और अन्य जरूरी जानकारियां ज्ञानदीप पोर्टल पर ऑनलाइन अपलोड की जानी थी. इसके लिए विभाग ने पहले 31 दिसंबर 2025 तक की समय सीमा तय की थी लेकिन, इसके बावजूद बड़ी संख्या में जिले के निजी विद्यालयों ने अब तक आवश्यक डेटा उपलब्ध नहीं कराया है. विभाग का मानना है कि यह न केवल सरकारी निर्देशों की अवहेलना है, बल्कि गरीब बच्चों के शिक्षा के मौलिक अधिकार का भी उल्लंघन है.
इस संबंध में जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (डीपीओ) द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि यदि तय तिथि तक पोर्टल पर सेवन क्षमता सहित अन्य अनिवार्य जानकारियां अपडेट नहीं की जाती हैं, तो संबंधित विद्यालय को शैक्षणिक रूप से निष्क्रिय माना जाएगा. ऐसी स्थिति में नियमों के तहत उस विद्यालय को पूर्ण रूप से बंद मानते हुए आगे की कार्रवाई की जाएगी. शिक्षा विभाग ने यह भी साफ कर दिया है कि डिफॉल्टर विद्यालयों के खिलाफ चरणबद्ध तरीके से सख्त कदम उठाए जाएंगे, जिसमें मान्यता रद्द करने, यू-डायस कोड निरस्त करने और सभी सरकारी योजनाओं से बाहर करने जैसी कार्रवाई शामिल है.
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यदि निजी विद्यालय समय पर डेटा अपडेट नहीं करते हैं, तो आरटीई के तहत होने वाली नामांकन प्रक्रिया प्रभावित होगी. इसका सीधा नुकसान आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद बच्चों को उठाना पड़ेगा, जो निजी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पाने से वंचित रह सकते हैं. इसी को देखते हुए इस बार विभाग ने किसी भी तरह की ढिलाई न बरतने का निर्णय लिया है. डीपीओ प्रियदर्शी सौरव ने कहा कि आरटीई अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन और वरीय अधिकारियों के निर्देशों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है और आदेश की अवहेलना करने वाले विद्यालयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई तय है.
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