सीतामढ़ जिले के प्रारंभिक विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था को हाईटेक बनाने की दिशा में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. 12 मार्च से शुरू हुई पहली से आठवीं कक्षा की वार्षिक परीक्षा में प्रश्नपत्रों का वितरण पूरी तरह डिजिटल कर दिया गया है. नई व्यवस्था के तहत, परीक्षा शुरू होने से मात्र 45 मिनट पहले ‘ई-शिक्षाकोष’ पोर्टल पर प्रश्नपत्र अपलोड किए जा रहे हैं.
बोर्ड पर प्रश्न लिखने की मजबूरी
डिजिटल व्यवस्था जहाँ पारदर्शी मानी जा रही है. वहीं धरातल पर शिक्षकों के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गई है. परीक्षा से ठीक 45 मिनट पहले पोर्टल पर प्रश्नपत्र मिलने के कारण शिक्षकों को आनन-फानन में प्रश्नों को ब्लैकबोर्ड पर लिखना पड़ रहा है. कई स्कूलों में बिजली या इंटरनेट की समस्या के कारण पोर्टल लॉगिन करने में देरी हो रही है, जिससे परीक्षा के समय प्रबंधन में कठिनाई आ रही है. शिक्षकों का कहना है कि एक साथ कई कक्षाओं के प्रश्नपत्रों को बोर्ड पर उतारने में काफी समय नष्ट हो रहा है, जिससे वे खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से तनावपूर्ण स्थिति में पा रहे हैं.
छात्रों में भ्रम: उत्तर लिखने के बजाय बोर्ड से उतार रहे प्रश्न
इस नई व्यवस्था ने न केवल शिक्षकों बल्कि छात्रों के लिए भी असमंजस की स्थिति पैदा कर दी है. नाम न छापने की शर्त पर जिले के दो-तीन शिक्षकों ने बताया कि बोर्ड पर प्रश्न लिखे होने के कारण कई छात्र भ्रमित हो रहे हैं. शिक्षकों ने बताया कि बार-बार समझाने के बावजूद कि यह केवल प्रश्न है और आपको अपनी उत्तर पुस्तिका में इसका उत्तर लिखना है, कई छात्र बोर्ड से हूबहू प्रश्न उतारने में ही अपना समय बिता दे रहे हैं. पहले प्रश्नपत्र सह उत्तरपुस्तिका होने के कारण छात्र सीधे उत्तर लिखते थे, लेकिन अब सादी कॉपियों और बोर्ड पर लिखे प्रश्नों के बीच समन्वय बिठाना छोटे बच्चों के लिए कठिन साबित हो रहा है.
30 मार्च को आएगा परिणाम
वार्षिक परीक्षा का यह दौर 12 मार्च से शुरू होकर 19 मार्च तक चलेगा. परीक्षा संपन्न होने के तुरंत बाद मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी. शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार, 19 से 24 मार्च के बीच उत्तर पुस्तिकाओं की जांच और मूल्यांकन का कार्य हर हाल में पूरा कर लेना है. इसके बाद 25 मार्च तक विद्यार्थियों के अंकों को प्रगति पत्रक और नामांकन पंजी में संधारित किया जाएगा. सत्र का समापन 30 मार्च को एक भव्य ‘अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी’ (PTM) के साथ होगा, जहाँ बच्चों का रिजल्ट उनके माता-पिता के साथ साझा किया जाएगा. विभाग का लक्ष्य है कि पारदर्शी मूल्यांकन के साथ समय पर नए सत्र की तैयारी शुरू की जा सके.
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