शिवहर जिले के शैक्षणिक परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. लंबे समय से उच्च शिक्षा के लिए मीलों का सफर तय करने वाले छात्र-छात्राओं के लिए बड़ी खुशखबरी है. राज्य सरकार और शिक्षा विभाग ने जिले के तीन प्रखंडों में डिग्री कॉलेज के संचालन की आधिकारिक स्वीकृति दे दी है.
इन तीन हाईस्कूलों से शुरू होगा शैक्षणिक सफर
फिलहाल, डिग्री कॉलेजों के अपने भवन बनने तक इनका संचालन चयनित हाईस्कूलों में किया जाएगा. इसके लिए पिपराही प्रखंड के धनकौल हाईस्कूल, पुरनहिया के बराही जगदीश हाईस्कूल और डुमरी कटसरी के फुलकाहा हाईस्कूल का चयन किया गया है. शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि जुलाई महीने से नया सत्र शुरू कर दिया जाएगा. सत्र शुरू होने से पहले इन स्कूलों में आवश्यक बुनियादी सुविधाएं, डेस्क-बेंच, संसाधन और योग्य शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाएगी. जिलाधिकारी को जल्द से जल्द उपयुक्त भूमि चिन्हित कर प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया गया है ताकि कॉलेज के स्थायी भवनों का निर्माण कार्य भी शीघ्र शुरू हो सके.
बेटियों की शिक्षा की राह होगी आसान, पलायन पर लगेगी रोक
प्रखंड स्तर पर कॉलेज खुलने का सबसे बड़ा लाभ ग्रामीण क्षेत्र की छात्राओं को मिलेगा. अब तक जिला मुख्यालय में मात्र एक डिग्री कॉलेज होने और दूरी अधिक होने के कारण कई मेधावी छात्राएं इंटर के बाद पढ़ाई छोड़ देती थीं. परिवहन की असुविधा और सुरक्षा कारणों से ग्रामीण क्षेत्रों में ड्रॉपआउट रेट अधिक था. सरकार के इस कदम से न केवल लड़कियों के लिए पढ़ाई का सुरक्षित माहौल बनेगा, बल्कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में जिले के नामांकन अनुपात (GER) में भी भारी वृद्धि होगी. स्थानीय लोगों का मानना है कि इस पहल से शिवहर की शिक्षा व्यवस्था की नींव और भी मजबूत होगी.
भविष्य की योजनाएं: पीजी की पढ़ाई और महिला कॉलेज पर जोर
शिक्षा के इस सुदृढ़ीकरण अभियान के तहत केवल नए कॉलेज ही नहीं, बल्कि मौजूदा व्यवस्था को भी अपग्रेड किया जा रहा है. जिला मुख्यालय स्थित अनुमंडल स्तरीय डिग्री कॉलेज को जिला स्तरीय कॉलेज में उत्क्रमित करने की प्रक्रिया जारी है, जहाँ जल्द ही पीजी (Post Graduation) की पढ़ाई भी शुरू हो सकेगी। इसके साथ ही, जिला मुख्यालय में एक विशेष महिला डिग्री कॉलेज की स्थापना के लिए भी गंभीरता से प्रयास किए जा रहे हैं. इन प्रयासों का मुख्य उद्देश्य शिवहर को एक एजुकेशनल हब बनाना है, ताकि यहाँ के युवाओं को हर बाधा से मुक्ति मिले और वे देश के विकास में अपना योगदान दे सकें.
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