कभी आर्थिक तंगी से जूझने वाली आरती आज अपने हुनर और मेहनत के दम पर न सिर्फ खुद का रोजगार सफलतापूर्वक चला रही हैं, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं. RSETI से प्राप्त प्रशिक्षण और नियोजनालय के माध्यम से मिली सिलाई मशीन ने उनके जीवन की दिशा पूरी तरह बदल दी है.
वर्तमान समय में आरती सिलाई-कटाई के साथ-साथ ब्यूटी पार्लर का भी सफल संचालन कर रही हैं. इससे उन्हें हर महीने करीब 15 से 20 हजार रुपये की आमदनी हो रही है, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है. आरती बताती हैं कि कोरोना महामारी के बाद बच्चों की पढ़ाई और पोषण पर गहरा असर पड़ने लगा था, ऐसे में उन्होंने घर की जिम्मेदारी खुद संभालने का निर्णय लिया.
कोरोना काल में लिया आत्मनिर्भर बनने का संकल्प
Local 18 से बातचीत में आरती कुमार ने बताया कि उनके पति की डुमरा कोर्ट परिसर में खादी कपड़ों की दुकान थी. कोरोना काल के दौरान लॉकडाउन और बाजार बंद रहने से दुकान पर बुरा असर पड़ा और परिवार की आमदनी लगभग ठप हो गई. आर्थिक संकट के इस दौर में आरती ने हालात के सामने घुटने टेकने के बजाय आत्मनिर्भर बनने का फैसला किया. उन्होंने RSETI से ब्यूटीशियन और सिलाई-कटाई का प्रशिक्षण लिया और स्वरोजगार की ओर कदम बढ़ाया. प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्होंने NCS पोर्टल पर पंजीकरण भी कराया, जिससे उन्हें सरकारी योजनाओं से जुड़ने में मदद मिली और आगे का रास्ता आसान हुआ.
नियोजनालय से मिली सिलाई मशीन बनी सहारा
आरती ने बताया कि NCS पोर्टल पर पंजीकरण के लगभग छह महीने बाद उन्हें नियोजनालय के माध्यम से मुफ्त सिलाई मशीन उपलब्ध कराई गई. इसके बाद उन्होंने सीतामढ़ी शहर के लक्ष्मणा नगर में किराए पर दुकान लेकर ब्यूटी पार्लर और सिलाई का काम शुरू किया. आज उनके यहां महिलाओं की अच्छी-खासी भीड़ रहती है. सिलाई और ब्यूटी पार्लर दोनों से होने वाली आमदनी से वे हर महीने 15 से 20 हजार रुपये तक की बचत कर पा रही हैं. वहीं, उनके पति फिलहाल पटना के महेंद्रू इलाके में एक छोटी रेडीमेड कपड़ों की दुकान चला रहे हैं, जिससे सीमित आमदनी हो पाती है. ऐसे में आरती की कमाई परिवार के लिए मजबूत सहारा बन गई है.
सरकारी सहयोग से आगे बढ़ाने का सपना
मूल रूप से सीतामढ़ी जिले के बैरगनिया प्रखंड के लोहापट्टी गांव की रहने वाली आरती कुमार अब अपने काम को और आगे बढ़ाने का सपना देख रही हैं. उनका कहना है कि यदि सरकार से लोन या अतिरिक्त सहयोग मिले, तो वे एक प्रशिक्षण केंद्र खोलना चाहेंगी, जहां बच्चों और युवतियों को सिलाई-कटाई और ब्यूटीशियन का प्रशिक्षण दिया जा सके. फिलहाल भी वे अपने स्तर पर कुछ लड़कियों को प्रशिक्षण दे रही हैं. आरती बताती हैं कि उन्होंने कई बार लोन के लिए आवेदन किया है, लेकिन अब तक अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पाया है. इसके बावजूद उनका हौसला कम नहीं हुआ है. वे लगातार प्रयास कर रही हैं और मानती हैं कि मेहनत और लगन से एक दिन उनके सपने जरूर पूरे होंगे.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें
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