जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर का सफर और फिर एक किलोमीटर की वह पथरीली, उबड़-खाबड़ चढ़ाई पार कर जब आप पैसिया गांव की दहलीज पर कदम रखते हैं, तो विकास के दावों की कलई खुलते देर नहीं लगती।
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