Narkanda Tour: हिमाचल प्रदेश में शिमला जिले में नारकंडा 8858 फीट ऊंचाई पर स्थित है, हाल ही में भारी बर्फबारी से चमक रहा है. हाटू पीक, हाटू माता मंदिर, तानी जुब्बर झील मुख्य आकर्षण हैं. यहां पर बेहत शांत माहौल आपको मिलेगा.
शिमला के नारकंडा में हाल ही में हुई बर्फबारी के बाद का नजारा. (फोटो विक्रांत)
दरअसल, हिमाचल प्रदेश में हाल ही में हुई बर्फबारी की वजह से बड़ी संख्या में टूरिस्ट आ रहे हैं. शिमला और मनाली के अलावा, सैलानियों के लिए घूमने के लिए कई ऑप्शन हैं और एक ऐसी ही ऑप्शन नारकंडा भी है.
नारकंडा में बीते सप्ताह जमकर हिमपात हुआ है.
दरअसल, शिमला जिले में 8,858 फीट की ऊंचाई पर नारकंडा स्थित है. भारत-तिब्बत सड़क (NH-5) पर स्थित नारकंडा शांत और खूबसूरत हिल स्टेशन है औऱ देवदार के जंगलों और सेब के बगीचों से घिरा हुआ है. नारकंडा में सालभर मौसम सुहावना बना रहता है. फिलहाल, अभी यहां पर भारी हिमपात हुआ है.
वो चीजें, जो यहां कर सकते हैं ट्राई
- वैसे तो नारकंडा आने वाले सैलानी कई चीजों का लुत्फ ले सकते हैं. लेकिन यहां पर ट्रैकिंग, स्कीइंग और घूमने के लिए कई इलाके हैं. नारकंडा के होटल कारोबारी विक्रांत बताते हैं कि अभी मौजूदा समय में काफी बर्फबारी यहां पर हुई है औऱ सैलानी ट्रैकिंग, कैंपिग और स्कीइंग का मजा ले सकते हैं. वह बताते हैं कि सैलानियों के लिए यहां पर कई होटल हैं.
- हाटू पीकः नारकंडा में हाटू पीक देखने के लिए भी सैलानी जा सकते हैं. हाटू पीक 3400 मीटर ऊंची चोटी है. जो अभी बर्फबारी से ढकी हुई है. यहां पर सैलानी हाईकिंग कर सकते हैं. हालांकि, यहां पर टॉप पर पहुंचने के लिए पैदल और सड़क मार्ग के जरिये पहुंचा जा सकता है.
- हाटू माता मंदिर. हाटू पीक के ऊपर स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर है. हाटू माता को यहां की कुलदेवी के तौर पर पूजा जाता है. सर्दियों में यह मंदिर बंद रहता है. क्योंकि भारी बर्फबारी होती है. मंदिर तक सड़क और पैदल पहुंचा जा सकता है. माना जाता है कि शिमला जिले में सबसे पहले इसी जगह पर बर्फ गिरती है.
- तानी जुब्बर झीलः नारकंडा से 15 किमी दूर तानी जुब्बड़ झील है. यहां पर सड़क मार्ग के जरिये पहुंचा जा सकता है. झील के आसपास सेब के बागीचे हैं. इस झील को देखने के लिए भी सैलानी आते जाते हैं.
- कैंपिंग, ट्रैकिंग और स्कीइंग: नारकंडा में सर्दियों के सीजन में स्कीइंग भी करवाई जाती है. इसके अलावा हाटू पीक के आसपास कैंपिंग और ट्रेकिंग भी की जा सकती है.
- कोटगढ़ और थानेदारः नारंकडा के पास कोटगढ़ और थानेदार के आसपास भी सैलानी जा सकते हैं और सेब के बगीचे भी देख सकते हैं. इन इलाकों को “हिमाचल के फलों का कटोरा” कहा जाता है.
हिमाचल प्रदेश में हाल ही में हुई बर्फबारी की वजह से बड़ी संख्या में टूरिस्ट आ रहे हैं.
नारकंडा जाने का रास्ता
दिल्ली औऱ चंडीगढ़ से नारकंडा जाने के लिए सड़क और हवाई मार्ग है. चंडीगढ़ से शिमला के लिए हेली टैक्सी सर्विस मौजूद है, जिसका किराया 3 हजार रुपये से अधिक है. वहीं, वहीं, चंड़ीगढ़ से ट्रेन के जरिये शिमला तक पहुंचा जा सकता है. शिमला से आगे नारकंडा के लिए केवल सड़क मार्ग है और टैक्सी औऱ बसों के जरिये सैलानी यहां पहुंच सकते हैं.
किन्नौर और स्पीति के लिए गेटवे
नारकंडा घूमने आने वाले सैलानी आगे किन्नौर भी जा सकते हैं. यहां पर किन्नौर की दूरी 150 किमी है और कल्पा, छिपकुल जैसी घूमने की जगहें भी हैं.
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