प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि यह शारीरिक परीक्षा केवल एक सामान्य कार्यात्मक फिटनेस जांच है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चयनित अभ्यर्थी पशु चिकित्सा संस्थानों और पशुपालन फार्मों में अपने आवश्यक दायित्व सुरक्षित रूप से निभा सकें. इन कार्यों में पशुओं को संभालना, बीमार भेड़ या बकरी (लगभग 25 किलोग्राम) को उठाना तथा चारे की बोरियां ले जाना शामिल है.
उन्होंने कहा कि यह कोई सहनशक्ति की प्रतियोगिता नहीं है और न ही इसका उद्देश्य किसी भी अभ्यर्थी, विशेषकर महिलाओं, का अपमान या भेदभाव करना है. यह परीक्षा सभी अभ्यर्थियों पर समान रूप से लागू की गई है और इसका एकमात्र उद्देश्य पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.
प्रवक्ता ने बताया कि 5,000 रुपये प्रतिमाह का मानदेय चार घंटे प्रतिदिन के अंशकालिक बहुउद्देशीय-कार्यों के लिए निर्धारित है. हालांकि कार्य अंशकालिक है, लेकिन पशुपालन से जुड़े कार्यों में शारीरिक श्रम शामिल होता है, इसलिए न्यूनतम शारीरिक क्षमता आवश्यक है. उन्होंने कहा कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए शारीरिक परीक्षा उप-मंडलाधिकारी (सिविल) की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा कराई जा रही है तथा इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जा रही है. अभ्यर्थी निर्धारित वजन को अपने अनुसार किसी भी सुविधाजनक तरीके से उठा सकते हैं, सिर पर उठाना अनिवार्य नहीं है. यदि निर्धारित प्रक्रिया से कोई परिवर्तन पाया जाता है तो उसकी जांच की जाएगी.
अब तक 315 अभ्यर्थी शारीरिक परीक्षा में शामिल
अब तक 315 अभ्यर्थी शारीरिक परीक्षा में शामिल हो चुके हैं और किसी भी प्रकार की चोट की कोई सूचना नहीं है. उन्होंने कहा कि विभाग सभी अभ्यर्थियों के साथ न्याय, सुरक्षा और सम्मान के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और जनता से आग्रह है कि वे भ्रामक या चयनित प्रस्तुतियों के बजाय अधिसूचित नीति पर भरोसा करें.
भाजपा के समय मल्टी टास्क वर्कर भर्ती पर कांग्रेस ने उठाए थे सवाल
गौरतलब है कि भाजपा सरकार में मल्टी टास्क वर्कर की भर्ती में भी यही पैमाना अपनाया गया था तो कांग्रेस ने इसे महिला सम्मान से जोड़ते हुए सवाल उठाए थे और इस 25 किलो भार वाली शर्त का विरोध किया था. लेकिन अब कांग्रेस सरकार में भी यही प्रक्रिया अपनाई जा रही है.
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