हिमाचल प्रदेश से नवनिर्वाचित राज्यसभा सदस्य अनुराग शर्मा के खिलाफ चुनाव आयोग से शिकायत की गई है. उन्हें 7 मार्च को हिमाचल प्रदेश से राज्यसभा के लिए निर्वाचित घोषित किया गया है. अनुराग शर्मा पर नामांकन प्रक्रिया के दौरान संपत्ति के विवरण छिपाने और चुनावी नियमों के उल्लंघन का आरोप है. शिकायतकर्ता ने निर्वाचन आयोग, राज्यसभा सचिवालय और संबंधित अधिकारियों से आग्रह किया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहे.
सीएम सुक्खू के साथ अनुराग शर्मा. (फाइल फोटो)
शिकायत में गया है कि कानून के अनुसार, किसी भी प्रत्याशी को नामांकन पत्र दाखिल करते समय अपनी और अपने परिवार की चल और अचल संपत्तियों का पूरा विवरण देना अनिवार्य होता है. यदि कोई जानकारी जानबूझकर छिपाई जाती है तो यह कानून का उल्लंघन माना जाता है. दायर शिकायत के अनुसार, निर्वाचन आयोग के पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी से यह सामने आया है कि अनुराग शर्मा की ओर से कई भूमि संपत्तियों का विवरण हलफनामे में नहीं दिया गया. इनमें जिला कांगड़ा के बैजनाथ और मुल्थान क्षेत्रों के साथ-साथ जिला मंडी के जोगिंदरनगर क्षेत्र में स्थित कई भूमि खातों का विवरण शामिल है. शिकायत में इन संपत्तियों के खाता नंबर और संबंधित गांवों का भी उल्लेख किया गया है.
6 करोड़ का ठेका
शिकायत में यह भी कहा गया है कि भूमि संपत्ति के अलावा एक लाइसेंसी हथियार से संबंधित विवरण भी नामांकन के दौरान प्रस्तुत दस्तावेजों में सही प्रकार से प्रदर्शित नहीं किया गया. शिकायत में पैरा 7 के तहत जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 9A का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि अनुराग शर्मा नामांकन दाखिल करते समय एक सरकारी ठेकेदार के रूप में कार्य कर रहे थे और उनके नाम पर लोक निर्माण विभाग के लगभग 16 करोड़ रुपये के ठेके चल रहे थे, जिनके कार्य अभी प्रगति पर बताए गए हैं. धारा 9A के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के पास सरकार के साथ सक्रिय अनुबंध हो तो वह चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया जा सकता है.
आनन-फानन में प्रमाण पत्र क्यों
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि इस मामले में विधानसभा सचिव की ओर से आनन-फानन में प्रमाण पत्र जारी किया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. शिकायतकर्ता ने कहा है कि यदि किसी उम्मीदवार के पास सरकारी अनुबंध लंबित हैं तो उसके संबंध में स्पष्ट स्थिति होने के बाद ही प्रमाण पत्र जारी किया जाना चाहिए था. अधिवक्ता निताशा कटोच ने अपनी शिकायत में कहा है कि उपलब्ध तथ्यों के आधार पर यह मामला जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 125A के तहत भी कार्रवाई योग्य बनता है, क्योंकि चुनावी हलफनामे में गलत या अपूर्ण जानकारी देना दंडनीय अपराध है.
क्या बोले मुख्यमंत्री सुक्खू
अनुराग शर्मा के निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुने जाने पर सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राहुल गांधी ने संगठन से निकले आम कार्यकर्ता को संसद का बनाया है, इससे पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश है. आने वाले समय में अच्छे कार्यकर्ता और लोगों के बीच पॉपुलर कार्यकर्ता को विधान सभा का टिकट देने पर विचार किया जा सकता है. नेता प्रतिपक्ष के आरोपों पर सीएम ने कहा कि आम कार्यकर्ता क्या करोड़पति नहीं हो सकता. अनुराग शर्मा की संपत्ति उनके पिता की कमाई हुई है, राजनीति से कमाई हुई संपत्ति नहीं है. अब वो सांसद बन गए हैं. ऐसे बातें बोलना नेता प्रतिपक्ष को शोभा नहीं देता, जो मेरे साथ एनएसयूआई के समय से 24 सालों से संगठन में है, उसे आगे अहमियत दी जाती है. जयराम ठाकुर ने 1 हजार करोड़ के भवनों के ठेके अपने ठेकेदार मित्रों को दिए हैं. मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के बाकी आरोपों पर कुछ नहीं बोले.
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Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें
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