हिमाचल प्रदेश: भारत देश अक्सर भूकंप के झटकों से दहलता रहता है. यहां उत्तर से लेकर दक्षिण तक और पूर्व से पश्चिम तक भूकंप के झटके महसूस होते हैं. इसके लिए एक भूकंपीय क्षेत्रीकरण तय किया गया है. अब देश में भूकंप डिजाइन कोड (बीआईएस, 2025) के अंतर्गत भ्रंशों, अधिकतम संभावित घटनाओं, क्षीणन, विवर्तनिकी, आश्मविज्ञान आदि के आधार पर एक संशोधित भूकंपीय क्षेत्रीकरण मानचित्र जारी किया है.
भारत में भूकंप खतरे का नया मानचित्र जारी किया गया है. पहले देश को भूकंप के चार क्षेत्रों- II, III, IV और V में बांटा गया था, लेकिन अब इसमें एक नए जोखिम वाले क्षेत्र VI को भी जोड़ा गया है. इसमें जोखिम भरे जोन में हिमालयी क्षेत्र को भी शामिल किया गया है, जिसे सबसे खतरनाक जोन में डाला गया है.
1. पूरा हिमालयी क्षेत्र पहली बार एक ही सबसे खतरनाक क्षेत्र VI में शामिल कर दिया गया है. पहले यह क्षेत्र IV और V में बंटा हुआ था.
2. सीमावर्ती कस्बे, जो दो क्षेत्रों के बीच आते थे, अब सीधे उच्च जोखिम वाले वर्ग में माने जाएंगे.
3. खतरे का आकलन अब प्रशासनिक सीमाओं के बजाय भूवैज्ञानिक स्थितियों के आधार पर किया जाएगा.
भारत की भूकंप संवेदनशीलता अब कितनी?
1. पहले की तुलना में अब अधिक क्षेत्र भूकंप के खतरे में आते हैं.
2. 61% जमीन अब मध्यम से उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में, जो पहले 59% थी.
3. देश की 75% आबादी अब भूकंपीय रूप से सक्रिय क्षेत्रों में रहती है.
भूकंप के सबसे खतरनाक जोन
1. जोन VI: अगरतला, भुज, चंडीगढ़, दार्जिलिंग, लेह, मंडी, पंचकुला, शिमला, शिलांग
2. जोन V: अम्बाला, अमृतसर, बहराइच, जालंधर, करनाल, सहारनपुर, रामपुर
3. जोन IV: नोएडा, दिल्ली, गुरुग्राम, गाजियाबाद
बता दें कि पुराने मैप (साल 2002 और 2016) के अनुसार, चार जोन बटे हुए थे, जिसमें जोन II सबसे कम खतरा और जोन V सबसे ज्यादा खतरा वाला क्षेत्र था, लेकिन सल 2025 में भारत के भूकंपीय मैप में नए जोन (जोन VI) को शामिल किया गया है, जिससे अब जोन की संख्या पांच हो गई है.
जोन VI में शामिल हिमालयी क्षेत्र
एक्सपर्ट के अनुसार, जोन VI को इसलिए शामिल किया गया, क्योंकि हिमालयी क्षेत्र में प्लेटों का टकराव हो रहा है, जिससे वहां दबाव बढ़ता जा रहा है. हिमालय के मुख्य हिस्से में 200 साल से कोई भूकंप नहीं आया, लेकिन दबाव बढ़ने से यह डर है कि अगर यहां एक बार भूकंप आया तो इसकी तीव्रता इतनी अधिक होगी कि अन्य राज्य में इसकी चपेट में आ सकते हैं, इसलिए इस राज्य को क्षेत्र को जोन VI में रखा गया है.
1. जोन II: बहुत कम खतरा (11% भूमि), दक्षिण भारत के कुछ हिस्से.
2. जोन III: मध्यम खतरा (30% भूमि), मध्य भारत.
3. जोन IV: उच्च खतरा (18% भूमि), दिल्ली, मुंबई जैसे शहर.
4. जोन V: बहुत उच्च खतरा (11% भूमि), गुजरात का कच्छ, पूर्वोत्तर.
5. जोन VI: सबसे ऊंचा खतरा (नया), पूरा हिमालय- जम्मू-कश्मीर से अरुणाचल तक.
नए मानचित्र के क्या बदलाव?
1. उच्च जोखिम वाले इलाकों में मजबूत और सुरक्षित निर्माण को बढ़ावा मिलेगा.
2. नरम मिट्टी या सक्रिय भ्रंशों (फॉल्ट लाइन्स) के पास नई बस्तियों और इमारतों के विस्तार पर रोक लग सकेगी.
3. हिमालयी राज्यों में एक जैसे भवन सुरक्षा मानक लागू किए जा सकेंगे, जिससे नुकसान कम करने में मदद मिलेगी.
सरल शब्दों में, यह नया मानचित्र बताता है कि भारत का बड़ा हिस्सा भूकंप के खतरे में है और अब पहले से ज्यादा सावधानी और बेहतर निर्माण की जरूरत है. एनडीएमए आपदा प्रबंधन नीतियां निर्धारित करने के लिए ज़िम्मेदार है और एसडीएमए आपदा योजनाएं बनाने और उन्हें लागू करने के प्रभारी हैं. राष्ट्रीय भूकंपीय नेटवर्क भूकंप गतिविधियों पर नजर रखता है और भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली विकसित करने पर अनुसंधान करता है.
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