दरअसल, बुधवार को सत्र के दौरान नियम 130 के तहत आपदा पर चर्चा हो रही थी. राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी चर्चा का जवाब दिया. जगत सिंह नेगी ने चर्चा का जवाब देना शुरू किया तो वह विपक्ष पर बरसे. इस पर भाजपा ने सदन में हंगामा कर दिया. नेता प्रतिपक्ष ने आपा खोते हुए मंत्री को नॉनसेंस कह दिया. हालांकि, स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि ये रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं है. इस बीच जगत नेगी और जय राम ठाकुर में जबरदस्त बहसबाजी देखने को मिली. विपक्षी विधायक नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर निकल गए.
इस पूरे मामले पर सीएम सुक्खू ने सदन में कहा कि विपक्ष का रवैया सही नहीं है. एक मंत्री के खिलाफ ऐसा कहना मर्यादा के खिलाफ है और इस पर स्पीकर को कार्रवाई करनी चाहिए.
वहीं, मंत्री जगत सिंह नेगी ने अपना दर्द सुनाते हुए कहा कि स्पीकर मुझे अपनी बात कहने नहीं देते और सिर्फ नेता प्रतिपक्ष की बात सुनी जाती है, जिससे जनता के बीच एकतरफा बात गई. मुझे बदतमीज कहा गया, मैंने क्या बदतमीजी की? नेगी ने कहा कि जय राम ठाकुर को सिर्फ अपनी चिंता है, आपदा में जय राम ठाकुर ने क्या किया, सिफ फोटो खिंचवाते रहे और ड्रामे करते रहे. पत्थर गिर भी नहीं रहे थे लेकिन फिर भी भाग रहे थे, इनको चिंता सिर्फ कंगना रनौत की थी.
नेगी बोले कि कंगना रनौत ने उन्हें फोन किया तो उन्हें कहा कि मत आओ, सड़कें बंद हैं, हमने और हमारे साथी संजय अवस्थी ने चुनौतियों की परवाह नहीं की, उन्हें अपनी चिंता है और कंगना की चिंता है, ताकि उनके पैरों में छाले न पड़े. नेगी ने कहा कि सराज के गलत तरीके से सड़कें बनीं, गलत तरीके से पेड़ काटे गए और वहीं दबा दिए गए, वो पेड़ आपदा में बह कर नदी में आए जो सबने देखा.
एबीवीपी पर एक्शन पर क्या बोले सीएम सुक्खू
एबीवीपी कार्यकर्ताओं पर हुई पुलिस कार्रवाई पर सीएम सुक्खू ने सदन में कहा कि एबीवीपी ने बिना परमिशन के प्रदर्शन किया और एबीवीपी कार्यकर्ताओं 3 घंटे तक गैर कानूनी तरीके से रास्ता रोके रखा. विधायकों समेत आम लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी और बैरीकेड तोड़े गए. साथ ही 3 महिला पुलिसकर्मियों के साथ एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने दुर्व्यवहार किया. एक महिला कांस्टेबल की बाजू में भी चोट आई है. पुलिस ने कोई लाठीचार्ज नहीं किया और केवल खींचतान हुई है और इसमें 5–6 पुलिसकर्मियों को चोटें आई हैं. एबीवीपी के किसी भी कार्यकर्ता को गंभीर चोट नहीं लगी है और अस्पताल में कोई भर्ती नहीं है. एबीवीपी को केवल मार्च करने की अनुमति दी थी. चार दिसंबर को बीजेपी का प्रदर्शन है, अगर ऐसी स्थिति बनती है तो सरकार जोरावर की परमिशन के बारे में सोचेगी.
इससे पहले, नेता प्रतिपक्ष ने सदन में कहा कि सीएम एक पक्ष न रखें. परमिशन क्यों नहीं दी गई, स्थिति को संभाला जाता है लेकिन लाठीचार्ज नहीं किया जाता, जिनके साथ गलत हुआ है, इसके बारे में पता किया जाएगा. सरकार अगर परमिशन के लिए धमका रही है तो बीजेपी का प्रदर्शन होकर रहेगा.
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