HAS Exam Results 2025: हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के झंडूता के रहने वाले अरुण कुमार सांख्यान ने भी प्रशासनिक सेवा परीक्षा पास की है. वह पहले भी इस परीक्षा में कामयाबी हासिल कर चुके हैं. उनके पिता जेबीटी टीचर रहे हैं. अरुण ने अपने परिवार और दोस्तों को कामयाबी का श्रेय दिया.
बिलासपुर के झंडूता विधानसभा क्षेत्र की पंचायत डाहड के रहने वाले अरुण कुमार संख्यान ने तीसरी बार सरकारी नौकरी हासिल की है.
बिलासपुर. रिटायर जेबीटी टीचर के बेटे ने दूसरी बार हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक सेवा का एग्जाम पास किया. अरुण कुमार संख्यान अब तहसीलदार बनने जा रहे हैं. इससे पहले, उन्होंने बीते 2024 में यही एग्जाम पास किया था और अभी नायब तलसीलदार के पद पर तैनात थे. यह कहानी अरुण कुमार संख्यान की है, जो कि बिलासपुर जिले के रहने वाले हैं.
जानकारी के अनुसार, बिलासपुर के झंडूता विधानसभा क्षेत्र की पंचायत डाहड के रहने वाले अरुण कुमार संख्यान ने तीसरी बार सरकारी नौकरी हासिल की है. अपनी कामयाबी को लेकर अरुण ने एक वीडियो भी जारी किया और अपने अब तक के सफर के बारे में जानकारी दी. अरुण कुमार संख्यान ने बताया कि उनके पिता ठाकुर दास शर्मा जेबीटी के पद से रिटायर हुए हैं. वहीं, माता देवी गृहिणी हैं.
अरुण बताते हैं कि वह डाहड के रहने वाले हैं और वह एक साधारण परिवार से हैं. उन्होंने गांव के स्कूल से ही अपनी पढ़ाई की और फिर शिमला में हिमाचल यूनिवर्सिटी से कैमिस्ट्री में पोस्ट ग्रेजुएशन की. फिर वर्ष 2021 में हिमाचल प्रदेश अलाइड परीक्षा पास की और ऑडिट इंस्पेक्टर बन गए. हालांकि, वह यहीं पर नहीं रुके और फिर साल 2023 में हिमाचल प्रशासनिक सेवा का एग्जाम दिया और पहले ही प्रयास में नायब तहसीलदार बने. हालांकि, उन्होंने फिर से कोशिश की और अब 2025 में तहसीलदार पद पर चयनित हुए हैं. उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, बहनों और धर्मपत्नी स्वेता शर्मा को दिया है.
सीमित सुविधाओं में सपना किया साकार
अरुण कहते हैं कि गांव की सीमित सुविधाओं के बीच एक सपना आकार लेने लगा. यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान उन्होंने तय किया कि वह प्रशासनिक सेवा में जाएंगे. उन्होंने कहा कि रास्ता आसान नहीं था और असफल भी हुआ. अरुण कहते हैं कि यह उपलब्धि मेरी अकेले नहीं है. मेरी पत्नी औऱ माता पिता के अलावा, दोस्त आदर्श शर्मा का भी काफी योगदान है. वह कहते हैं कि सपने पूरे होते हैं, बस उनका पीछा ना छोड़े. किसी की पृष्टिभूमि मायने नहीं रखती है, उसकी मेहनत मायने रखती है.