शिमला में कमर्शियल गैस सिलेंडर नहीं मिलने से होटल और रेस्टोरेंट कारोबार पर बड़ा असर पड़ रहा है और हाहाकार मचना शुरू हो गया है. वहीं, राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि इस पूरी स्थिति पर नजर बनी हुई है और केंद्र सरकार के साथ भी राज्य सरकार संपर्क में हैं. मुख्य मंत्री के प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान ने कहा कि होटल एसोसिएशन की तरफ से राहत की मांग की गई है. उन्होंने कहा कि भारत सरकार को भी इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए.
होटलों के लिए कमर्शियल सिलेंडर मिलना बंद होने से शादियों की बुकिंग कैंसल करनी पड़ रही है, होटल मालिकों को ग्राहकों के पैसे लौटाने पड़ रहे हैं. कुछ होटलों ने खाने का मेन्यू तक बदल दिया है.
होटल लॉर्ड्स ग्रे और होटल लैंडमार्क ने एलान किया है कि गैस संकट को देखते हुए मेहमानों के लिए अब दाल-रोटी, सब्जी और चावल ही परोसे जाएंगे. किल्लत इतनी बढ़ गई है कि इन होटलों में इंडक्शन चूल्हे पर चाय बनाई जा रही है. होटल के किचन में पड़े सभी सिलेंडर खाली हैं और कब तक ये भरे जाएंगे, इसको लेकर कंपनियां या सरकारी अघिकारी कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं हैं.
होटल लैंडमार्क के मालिक राजीव अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने 2 दिन में बुकिंग के 1.50 लाख रुपए ग्राहक को लौटा दिए हैं. बदले में उन्हें ग्राहकों से खरी-खोटी सुनने को मिल रही है. इतना ही नहीं बल्कि होटल में होने वाली पार्टियां भी कैंसल कर दी है. राजीव अग्रवाल ने बताया कि इसकी वजह सिर्फ एक है और वो गैस है. जब खाना बनाने के लिए आपके पास गैस ही नहीं होती तो आप मेहमानों को क्या परोसोगे. उन्होंने बताया कि होटल का रेस्टोरेंट खाली पड़ा है, कभी कुछ ग्राहक आ रहे हैं तो उनके लिए मेन्यू में बदलाव किया गया है, गैस की बचत के लिए तली हुई चीजें और चाइनीज बनाया नहीं जा रहा है.
होटल एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि कुछ दिन के लिए स्थिती को संभालने के लिए घरेलू गैस सिलेंडर मुहैया करवाए जाएं. इस पूरे मामले को लेकर शिमला होटल एंड टूरिज्म स्टेकहोल्डर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहिंद्र कुमार सेठ ने बताया कि सरकार से इस संबंध में तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है. एसोसिएशन ने पर्यटन विभाग को पत्र लिखकर होटल उद्योग को राहत देने के लिए घरेलू गैस सिलेंडर उपलब्ध करवाने की मांग उठाई है.
मोहिन्द्र सेठ ने कहा कि इस स्थिति में सरकार को दोष देना सही नहीं है, लेकिन सरकार की तरफ से अचानक ये एलान किया गया कि आज से कमर्शियल सिंलेंडर नहीं मिलेंगे, इस स्थिति के लिए हम तैयार भी नहीं थे. शिमला में खाना पकाने के लिए इंधन के रूप में और कोई व्यवस्था है ही नहीं. गैस संकट का असर अब पर्यटन कारोबार पर भी दिखने लगा है. ट्रैवल एजेंट्स के पास फोन आ रहे हैं और पर्यटक पूछ रहे हैं कि क्या शिमला में खाना मिल पाएगा या नहीं. अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो पर्यटन सीजन के बीच शिमला के होटल उद्योग को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.
पर्यटन सीजन के बीच शिमला के होटल उद्योग को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.
पर्यटन विभाग को लिखे पत्र शिमला होटल एंड टूरिज्म स्टेकहोल्डर्स एसोसिएशन ने कहा कि वर्तमान में व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति न होने के कारण होटल उद्योग को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. इस कमी के कारण कई होटलों की रसोइयों को आंशिक या पूरी तरह बंद करना पड़ रहा है, जिससे आतिथ्य सेवाओं में भारी बाधा आ रही है. स्थिति इसलिए और गंभीर हो गई है क्योंकि होटल स्टाफ के लिए भोजन तैयार करने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध नहीं है. होटल कर्मचारियों के भोजन के लिए भी व्यावसायिक एलपीजी पर ही निर्भरता है. किसी ठोस समाधान के अभाव में कर्मचारियों की भलाई और आवश्यक आतिथ्य सेवाओं की निरंतरता पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है.
गैस बचाने के लिए बिजली से चलने वाले चूल्हे से चाय बनाई जा रही है.
इस स्थिति को देखते हुए होटल स्टाफ के भोजन की तैयारी के लिए अस्थायी रूप से घरेलू एलपीजी सिलेंडरों के उपयोग की अनुमति दी जाए. संबंधित गैस आपूर्ति कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित कर होटलों और रेस्टोरेंट्स को सीमित और नियंत्रित मात्रा में घरेलू या व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि रसोई का बुनियादी संचालन जारी रह सके और मेहमानों को आवश्यक भोजन सेवाएं मिलती रहें. उधऱ, शिमला में सीएम सुक्खू ने मीडिया के गैस संकट पर सवाल पर कोई जबाव नहीं दिया और सवाल को इग्नोर कर दिया.
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