एसपी अशोक रत्न ने बताया कि इस केस में 20 दिसंबर को जब सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज हुई थी तो लेकिन उस दौरान आरोपी प्रोफेसर का नाम, उसमें नहीं लिया गया था. अब 1 जनवरी को हुई एफआईआर में नाम दिया गया है. एसपी ने बताया कि उस दौरानसेक्शुअल हरसमेंट का कोई भी जिक्र नहीं किया गया था. उन्होंने कहा कि लड़की दो महीने में 7 अस्पतालों में इलाज चला था और मौत के असली कारणों का भी पता किया जा रहा है. लड़की दलित समुदाय थी. एसपी ने बताया कि शुरुआती स्टेज में जांच को लेकर अब तक कुछ नहीं कहा जा सकता है.
छात्रा के दो वीडियो
इस मामले में छात्रा के दो वीडियो अब सामने आए हैं. एक अस्पताल के बेड पर रिकॉर्ड किया गया है और दूसरा किसी घर में रिकॉर्ड किया गया है. अस्पताल के बेड पर एक महिला छात्रा से सवाल जवाब कर रही है. छात्रा एक वीडियो में प्रोफेसर अशोक का नाम ले रही है और आरोप लगा रही है कि वह बैड टच करते थे औऱ उनके पीछे पड़े रहते और वह काफी बुरे सर थे. जबकि दूसरे वीडियो में छात्रा कहती हैं कि अशोक सर अच्छे टीचर हैं. गौरतलब है कि छात्रा ने अपने अपनी तीन साथी छात्राओं पर आरोप लगाए हैं, जिन पर भी केस दर्ज किया गया है.
कॉलेज प्रिंसिपल ने भी दिया बयान
इस पूरे विवाद पर धर्मशाला कॉलेज के प्रिंसिपल का भी बयान आया है और उन्होंने कहा कि छात्रा फर्स्ट इयर में पढ़ती थी औऱ फेल हो गई थी. क्योंकि सेकेंट ईयर में उसने दाखिला लिया था. लेकिन रिजल्ट के बाद नियमानुसार दाखिला रद्द होते हुए फर्स्ट ईयर में ही होना था. लेकिन 29 जुलाई 2025 के बाद छात्रा कॉलेज नहीं आई और ना ही फीस भरी गई. ऐसे में छात्रा अब कॉलेज की स्टूडेंट नहीं थी. उन्होंने कहा कि छात्रा ने रैगिंग की शिकायत भी नहीं दी थी.
मृतक छात्रा के पीड़ित पिता ने इस पूरे मामले में कॉलेज प्रशासन, पुलिस प्रशासन और समाज की सोच पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं, उन्होंने बताया कि जिस कॉलेज में बेटी को पढ़ाने भेजा वहां न केवल कॉलेज की छात्राओं ने उसके साथ दुर्व्यवहार किया, बल्कि प्रोफेसर तक ने उसे टॉर्चर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, उसे जातिसूचक शब्द कहे गए. बेटी मानसिक तौर पर इतनी प्रताड़ित हुई कि आज वो इस दुनिया को ही अलविदा कह गई. ये बेहद निंदनिय घटना है. आज अगर इस पर कड़ा संज्ञान नहीं लिया गया तो निकट भविष्य में उनकी बेटी की मानिद दूसरों की बेटियां भी इसी तरह से प्रताड़ित होती रहेंगी और उन्हें न्याय मिलेगा कि नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं, उन्होंने पुलिस से भी नाउम्मीद होने की बात कही और कहा कि शुरुआती दौर में उन्हें भी इस मामले को CM हेल्पलाइन तक ले जाना पड़ा, अगर यहां पुलिस मुस्तैद होती तो शायद ऐसा न होता.
कॉलेज को शिकायत दी थी- पिता
पिता ने मीडिया से बातचीत में कहा कि फर्स्ट इयर में उन्होंने मामले में कॉलेज में शिकायत दी थी औऱ उनकी पत्नी कॉलेज की कमेटी से मिली थी. हालांकि, उन्होंने मामले को आगे नहीं बढ़ाया था. पिता ने अपने आरोपों में कहा कि उनकी बेटी को जाति के नाम पर प्रताड़ित किया जाता था और बेटी ने कई बार उन्हें इस बारे में बताया था. कॉलेज में पढ़ने के बाद ही डिप्रेशन में गई थी और मेरी बेटी पढ़ने में अच्छी थी. प्रोफेसर की वजह से ही यह हुआ है. पुलिस के एक बयान पर पिता ने कहा कि उन्होंने पहले कभी ऐसा नहीं कहा था कि मामले में कार्रवाई ना की जाए. पुलिस आरोपी प्रोफेसर का नाम तक छुपा रही है. 29 जुलाई के बाद क़ॉलेज ना जाने के दावों पर पिता ने कहा कि वह खुद कॉलेज छोडकर आते थे और कॉलेज का दावा झूठा है.
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