शिमला में नामांकन से पहले अनुराग शर्मा ने बताया कि परिवार को रात 3 बजे टिकट की सूचना दी गई थी. अनुराग शर्मा ने अपनी पत्नी को फोन कर बताया कि उन्हें राज्यसभा का टिकट मिला है. अनुराग को सीएम ने ने बताया कि उन्हें प्रत्याशी बनाया जा रहा है.
नामांकन दाखिल करने के बाद कांग्रेस प्रत्याशी अनुराग शर्मा ने पार्टी हाईकमान का आभार जताया और कहा कि इस पद के लिए चुने जाने की उम्मीद नहीं थी. अनुराग शर्मा ने कहा कि वह छात्र जीवन से ही कांग्रेस की छात्र इकाई नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया से जुड़े रहे हैं और लंबे समय तक प्रदेश कांग्रेस के साथ संगठन में काम करते रहे हैं. उन्होंने बताया कि कांगड़ा से ही उन्हें कांग्रेस का जिला अध्यक्ष बनने का मौका मिला. अनुराग शर्मा ने दावा किया कि कांगड़ा जिले से ही कांग्रेस को बड़ा समर्थन मिलेगा और आने वाले समय में विधानसभा की 15 की 15 सीटें कांग्रेस की झोली में आएंगी. उन्होंने केंद्र की भाजपा सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि हर साल करोड़ों नौकरियां देने के वादे के साथ भाजपा केंद्र में सत्ता में आई थी, लेकिन आज बेरोजगारी देश का एक बड़ा मुद्दा बन चुका है. उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के संदर्भ में रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट को बंद किया जाना भी आज राज्य का सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है.
उधऱ, सीएम सुक्खू ने शिमला में मीडिया से बातचीत में कहा कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की सोच को सलाम करते हैं, जिन्होंने एक आम कार्यकर्ता को राज्य सभा के लिए चुना, आम कार्यकर्ता अपने जीवन में इसके बारे में सोच भी नहीं सकता था, ये राहुल गांधी की सोच है, प्रदेश कांग्रेस पार्टी इसके लिए पार्टी हाईकमान का धन्यावाद करते हैं.
सीएम ने कहा कि राजनीतिक समीकरण बदलते रहते हैं और अनुराग शर्मा कांगड़ा से हैं और संगठन सृजन अभियान से निकले हैं. हमने केवल यही बात रखी थी कि प्रत्याशी हिमाचल का हो. बकौल सीएम, बीजेपी कैंडिडेट देती तो तब भी हार जाती. जिनकी नैतिकता नहीं थी वो पिछली बार बिक गए थे, और अब कांग्रेस के विधायकों की नैतिकता है, हमें इस बार कोई डर नहीं था.
भाजपा के पास नहीं संख्या बल
उधर, नामांकन के दौरान सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू, डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री और विधान सभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार समेत तमाम मंत्री और विधायक भी मौजूद रहे. इससे पहले, देरी से विधायक दल की मीटिंग हुई. गौर रहे कि भाजपा के चुनाव में अपना प्रत्याशी नहीं उतारा है क्योंकि उसे पास जीत के लिए पर्याप्त संख्या बल नहीं है. कांग्रेस के पास 40 विधायक और भाजपा के पास 28 विधायक हैं.
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