यमुनानगर। हथिनीकुंड बैराज से राजस्थान तक पानी पहुंचाने और साथ में स्टेट हाईवे विकसित करने की महत्वाकांक्षी परियोजना भले ही भविष्य की योजना दिखती हो, लेकिन इसकी नींव अब ठोस तौर पर रखी जा चुकी है। 25 हजार करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली यह परियोजना देश की सबसे बड़ी जल और आधारभूत संरचना योजनाओं में गिनी जा रही है।
हालांकि, इसका वास्तविक निर्माण कार्य शुरू होने में अभी डेढ़ से दो साल का समय लग सकता है, क्योंकि इससे पहले कई तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी की जानी है। परियोजना की सबसे पहली और अहम कड़ी एलाइनमेंट तय करना है। किस जिले, किस गांव और किस मार्ग से पाइपलाइन और स्टेट हाईवे गुजरेंगे, इसका अंतिम खाका इसी चरण में तैयार होगा।
अधिकारियों के अनुसार एलाइनमेंट तय होने के बाद डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाई जाएगी, जिसमें लागत, तकनीक, क्षमता और चरणबद्ध कार्य योजना का पूरा ब्यौरा होगा। डीपीआर तैयार होने के बाद यह मामला सेंट्रल वॉटर कमीशन (सीडब्ल्यूसी) के पास जाएगा।
वहां से तकनीकी स्वीकृति मिलना परियोजना के लिए निर्णायक मोड़ होगा। इसके बाद ही केंद्र सरकार स्तर पर फंडिंग की प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी। फंडिंग सुनिश्चित होने के बाद टेंडर और निर्माण से जुड़ी आगे की कार्रवाई शुरू होगी। यही कारण है कि इस बड़े प्रोजेक्ट को जमीन पर उतरने में अभी समय लगना तय माना जा रहा है।
हालांकि शुरुआती स्तर पर काम की रफ्तार संतोषजनक बताई जा रही है। करीब डेढ़ माह पहले इस परियोजना का सर्वे पूरा कर लिया गया है। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर ही एलाइनमेंट और डीपीआर का काम आगे बढ़ाया जाएगा। सर्वे के दौरान इस बात पर खास ध्यान दिया गया है कि घनी आबादी वाले क्षेत्रों और शहरी इलाकों को बाइपास किया जाए, ताकि भूमि अधिग्रहण और सामाजिक प्रभाव न्यूनतम रहे।
यह परियोजना केवल राजस्थान को पानी देने तक सीमित नहीं है। हथिनीकुंड से निकलने वाली 295 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के ऊपर 10 मीटर चौड़ा स्टेट हाईवे भी बनेगा, जो यमुनानगर, करनाल, कैथल, जींद और हिसार जैसे जिलों के दर्जनों गांवों को सीधी सड़क कनेक्टिविटी देगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन आसान होगा और आर्थिक गतिविधियों को नया आधार मिलेगा।
जल प्रबंधन के नजरिये से यह योजना इसलिए भी अहम है क्योंकि बरसात के मौसम में यमुना नदी में उपलब्ध अतिरिक्त पानी का अब तक समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा था।
इस परियोजना के जरिए उसी अतिरिक्त पानी को संरक्षित कर राजस्थान जैसे जल संकटग्रस्त क्षेत्रों तक पहुंचाया जाएगा। साथ ही आवश्यकता पड़ने पर हरियाणा भी इसी पाइपलाइन से अपने गांवों को पेयजल उपलब्ध करा सकेगा।
इस योजना से काफी लाभ होगा। इससे हरियाणा के गांवों को भी नया जीवन मिलेगा। 25 हजार करोड़ रुपये से अधिक की परियोजना है। इस कार्य को शुरू होने में डेढ़ से दो साल लग जाएंगे। इस प्रोजेक्ट की डीपीआर भी बनेगी, उसके बाद सीडब्ल्यूसी में केस जाएगा, उसके बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू होगी। -रवि मित्तल, एसई, सिंचाई विभाग।
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.