मौनी अमावस्या पर नर्मदा स्नान के लिए सीहोर, नर्मदापुरम के अलावा हरदा, इटारसी, बैतूल, भोपाल, विदिशा, बीना, छिंदवाड़ा सहित कई जिलों और शहरों से बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु पहुंचे। घाटों पर श्रद्धालु स्नान के साथ-साथ पूजन-पाठ, कथा, तर्पण और दान-पुण्य करते नजर आए। धार्मिक विद्वानों के अनुसार इस दिन मौन रहकर स्नान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है, जो कभी समाप्त नहीं होता।
ये भी पढ़ें: Jhalawar News: प्यार के चक्कर में एमपी का युवक राजस्थान में फंसा, प्रेमिका के परिजनों ने बनाया बंधक
नर्मदा स्नान के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवीधाम सलकनपुर में मां बीजासन के दर्शन के लिए पहुंचे। माघ अमावस्या के अवसर पर सलकनपुर धाम में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। रविवार को करीब दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने मातारानी के दर्शन किए। मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र भक्तों से खचाखच भरा रहा।
रोप वे बंद, सीढ़ी और सड़क मार्ग पर लगा जाम
इस दौरान सलकनपुर धाम में मां बीजासन रोप वे सेवा अस्थायी रूप से बंद रहने से श्रद्धालुओं को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। तकनीकी रखरखाव के चलते इसे 16 से 20 जनवरी तक बंद रखा गया है। रोप वे बंद होने से श्रद्धालुओं को सीढ़ी और सड़क मार्ग से दर्शन करने पड़े, जिससे दोनों मार्गों पर घंटों जाम की स्थिति बनी रही।
मौनी अमावस्या का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माघ मास की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है। शिवपुराण सहित अन्य ग्रंथों में इस तिथि का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, दान-पुण्य और मौन व्रत का विधान है। मान्यता है कि इस दिन दान करने से ग्रह दोष समाप्त होते हैं और पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है।
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.