जांच में सामने आया कि आरोपी गांव-देहात और शहरी क्षेत्रों में ऐसे लोगों को चिन्हित करते थे, जिन्हें पैसों की जरूरत होती थी। उन्हें मामूली कमीशन का लालच देकर बैंक खाते, एटीएम कार्ड और मोबाइल सिम हासिल किए जाते थे। इसके बाद इन्हीं खातों का उपयोग साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि निकालने और अन्य खातों में ट्रांसफर करने में किया जाता था, ताकि असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो सके।
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सीएसपी अभिनंदना शर्मा ने बताया कि कोतवाली पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजेक्शन और मैदानी साक्ष्यों के आधार पर मामले की अंतरराज्यीय कड़ी जोड़ी। इसी क्रम में राजस्थान के जोधपुर निवासी विष्णु साहू और विष्णु खावा को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के कब्जे से अपराध में प्रयुक्त मोबाइल फोन और एटीएम कार्ड जब्त किए गए हैं।
इस साइबर ठगी गिरोह में कुल पांच आरोपियों के नाम सामने आए हैं। इनमें रोहित और कपिल वर्मा निवासी दिवडिया थाना इछावर, अंकित निवासी सीहोर, तथा जोधपुर (राजस्थान) निवासी विष्णु साहू और विष्णु खावा शामिल हैं। पुलिस का मानना है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और देश के विभिन्न हिस्सों में साइबर ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहा था।
इस कार्रवाई में थाना प्रभारी रविंद्र यादव के नेतृत्व में प्रधान आरक्षक पंकज यादव, मृत्युंजय तिवारी, आरक्षक कपिल मेवाड़ा, चेतन चौहान और कृष्णकांत यादव की अहम भूमिका रही। पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे कभी भी अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, ओटीपी या सिम किसी को न दें। थोड़े से लालच में लिया गया गलत फैसला भविष्य में बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है।
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