जिले के आष्टा इलाके में एक चौंकाने वाली और सनसनीखेज घटना सामने आई है। बीमारी से बचाने के लिए पिलाया गया हल्दी का घोल ही 61 भेड़-बकरियों की मौत का कारण बन गया। राजस्थान से आए पशुपालकों का दावा है कि बाजार से खरीदी हल्दी में मिलावट थी। प्रशासन ने सैंपल जांच के लिए भेज दिए हैं।
जानकारी के अनुसार आष्टा क्षेत्र के पार्वती थाना अंतर्गत ग्राम मैना और खामखेड़ा के बीच सड़क किनारे डेरा डाले पशुपालकों के यहां अचानक मातम पसर गया। जिन भेड़-बकरियों को बीमारी से बचाने के लिए हल्दी का घोल पिलाया गया था, वही घोल कुछ ही घंटों में मौत का पैगाम बन गया। देखते ही देखते 61 पशु तड़प-तड़पकर मर गए, जबकि 150 से अधिक की हालत बिगड़ गई।
पीड़ित पशुपालक 40 वर्षीय हरतिगाराम पिता रूपाजी, निवासी जालौर (राजस्थान) ने बताया कि वे अपने परिवार के साथ क्षेत्र में डेरा डाले हुए हैं। परंपरा के अनुसार वे पशुओं को संक्रमण से बचाने के लिए समय-समय पर हल्दी का घोल पिलाते हैं। रविवार को मैना के साप्ताहिक बाजार से हल्दी खरीदी गई थी। सोमवार सुबह करीब 10 बजे लगभग 220 भेड़-बकरियों को घोल पिलाया गया। कुछ ही देर में पशुओं को उल्टी, दस्त और तेज कमजोरी की शिकायत होने लगी। हालात इतने तेजी से बिगड़े कि 61 पशुओं ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
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घटना के बाद पशुपालकों ने सीधा आरोप लगाया कि बाजार से खरीदी गई हल्दी में कोई जहरीला तत्व या रासायनिक मिलावट हो सकती है। उनका कहना है कि वर्षों से वे इसी तरीके से हल्दी पिलाते आए हैं लेकिन कभी ऐसी त्रासदी नहीं हुई। ग्रामीणों ने भी आशंका जताई है कि कहीं सस्ती और नकली हल्दी तो बाजार में नहीं बेची जा रही। यदि ऐसा है तो यह केवल पशुओं के लिए नहीं, इंसानों के लिए भी गंभीर खतरे की घंटी है।
घटना की सूचना मिलते ही पशु चिकित्सा विभाग सक्रिय हो गया। विभाग के डॉ. माहेश्वरी ने 61 मौतों की पुष्टि की। टीम ने मौके पर पहुंचकर बीमार पशुओं का तत्काल उपचार शुरू किया। प्राथमिक इलाज के बाद करीब 150 पशुओं की हालत स्थिर बताई जा रही है। डॉक्टरों ने मृत पशुओं का पोस्टमार्टम कर बिसरा सुरक्षित किया है। हल्दी के सैंपल भी एकत्र कर जांच के लिए सागर स्थित लैब भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह सामने आ सकेगी।
इधर घटना की गंभीरता को देखते हुए आष्टा जनपद पंचायत के सीईओ अमित व्यास, पटवारी और ग्राम पंचायत के सरपंच-सचिव मौके पर पहुंचे। पूरे क्षेत्र का मुआयना किया गया और पशुपालकों से पूछताछ की गई। ग्रामीणों ने मांग की है कि जिस दुकानदार से हल्दी खरीदी गई, उसके पूरे स्टॉक की जांच की जाए और यदि मिलावट साबित हो तो सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
एक साथ 61 पशुओं की मौत के बाद संक्रमण फैलने का खतरा भी मंडराने लगा था। प्रशासन के निर्देश पर ग्राम पंचायत ने जेसीबी से गड्ढे खुदवाकर सभी मृत भेड़ों को दफन कराया। इस दौरान राजस्व और पशु चिकित्सा विभाग की टीम मौजूद रही। बीमार पशुओं का उपचार जारी है और उन्हें अलग स्थान पर रखा गया है ताकि संक्रमण या अन्य खतरे को रोका जा सके।
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पार्वती थाना प्रभारी राजेंद्र परमार ने बताया कि मामले की प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई है। पोस्टमार्टम और लैब रिपोर्ट आने के बाद यदि मिलावट या लापरवाही साबित होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि हल्दी कहां से लाई गई थी और सप्लाई चेन में कहीं कोई संदिग्ध कड़ी तो नहीं है।
पशुपालकों पर आर्थिक संकट
61 भेड़-बकरियों की मौत ने पशुपालक परिवार को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया है। एक अनुमान के मुताबिक लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। पशुपालकों ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की है। उनका कहना है कि यदि मिलावट साबित होती है तो दोषी व्यापारी से क्षतिपूर्ति दिलाई जाए।
लैब रिपोर्ट पर टिकी नजर
फिलहाल पूरे मामले की सच्चाई सागर लैब की रिपोर्ट पर टिकी है। यदि हल्दी में जहरीला रसायन या मिलावट पाई जाती है तो यह खाद्य सुरक्षा और पशु आहार से जुड़ा बड़ा घोटाला साबित हो सकता है।
ग्रामीणों और पशुपालकों की मांग है कि जांच निष्पक्ष हो और दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिले। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि रिपोर्ट के आधार पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। आष्टा की इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बाजार में बिक रहा सामान सचमुच सुरक्षित है, या सस्ते मुनाफे की अंधी दौड़ में जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है?
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