झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र का आज दूसरा दिन है। सत्र का दूसरा दिन काफी महत्वपूर्ण है। आज राज्य सरकार वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए द्वितीय अनुपूरक बजट सदन पटल पर रखेगी। सदन की कार्यवाही के दूसरी पाली में बजट पेश किया जाएगा।
मिली जानकारी के अनुसार इस बजट में मईयां सम्मान योजना पर फोकस की है। वैसे तो विभिन्न विभागों पर भी ध्यान दिया गया है। सरकार ने विभिन्न विभागों की लंबित जरूरतों और योजनाओं को इस वित्तीय वर्ष में पूरा करने के लिए कुल 8 हजार करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया है।
मईयां सम्मान योजना पर फोकस बजट
मिली जानकारी के अनुसार प्रस्तावित बजट वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए तैयार किया गया है, जिसमें सरकार ने विभिन्न विभागों की लंबित जरूरतों और योजनाओं के लिए अतिरिक्त धनराशि का प्रावधान किया है। सरकार की ओर से विभिन्न विभागों ने तकरीबन 13,000 करोड़ रुपए बजट की मांग की थी। जिसमें से समीक्षा के बाद आठ हजार करोड़ रुपए की मंजूरी राज्य सरकार ने दी है।
सरकार ने इस अनुपूरक बजट में सबसे अधिक प्राथमिकता मईयां सम्मान योजना को दी है। बताया जा रहा है कि इसके लिए सबसे अधिक राशि आवंटित की गई है। इसके अलावा सिंचाई परियोजनाओं, सड़क निर्माण, शिक्षा, स्वास्थ्य और मेडिकल शिक्षा से संबंधित कामों को गति देने पर व्यापक फोकस रखा गया है।
केंद्र और राज्य स्तर से मिलने वाली राशि के समायोजन का भी प्रावधान किया गया है, ताकि विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की वित्तीय बाधा न आए।
विपक्ष की सरकार को घेरने की तैयारी
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की अध्यक्षता में हुई बैठक में विपक्ष ने राज्य सरकार की नीतियों और हाल के फैसलों पर संयुक्त रणनीति तय की है। भाजपा के मुख्य सचेतक नवीन कुमार के अनुसार विपक्ष सदन के दौरान राज्य में छात्रवृत्ति रोकने, परीक्षा शुल्क बढ़ाने और धान की खरीद में हो रही देरी जैसे मुद्दों पर सरकार को सदन में घेरेगी।
परीक्षा शुल्क में असामान्य वृद्धि कर सरकार ने छात्रों पर आर्थिक बोझ बढ़ा दिया है, जबकि छात्रवृत्ति रोकने से लाखों विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। धान खरीद को लेकर किसानों में भारी नाराजगी है।
बैठक में यह भी तय किया गया कि केंद्र सरकार पिछले वर्षों में राज्य को 12 लाख पीएफसी ब्लॉक आवंटित कर चुकी है, लेकिन राज्य सरकार के उदासीन रवैये के कारण इनका उपयोग नहीं हो सका। भाजपा नेताओं का आरोप है कि सरकार केवल घोषणाएं कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर योजनाएं लागू करने में विफल है। बैठक में विधायक दल ने तय किया कि सदन में इन सभी मुद्दों पर सरकार से ठोस जवाब मांगा जाएगा।
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