धर्मशाला। खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग कांगड़ा की ओर से डेढ़ माह पहले खनियारा और कोतवाली के गोदामों से भरे गए चावल के सैंपलों की रिपोर्ट विभाग के पास पहुंच चुकी है। शिमला लैब से धर्मशाला पहुंची रिपोर्ट के अनुसार चावल उपभोक्ताओं के खाने लायक पाए गए हैं। जांच के दौरान चावल केवल 0.08 फीसदी कनकी (टूटे हुए चावल) पाए गए हैं, जो खाने के लिए बेहतर और लाभदायक हैं।
विभाग का कहना है डिपुओं में मिलने वाले चावलों में एक क्विंटल की मात्रा में 250 ग्राम तक कनकी रह सकती है। लोग इन चावलों का मुकाबला बाजार के चावलों से करते हैं, जबकि बाजारों में बिल्कुल साफ और पॉलिस किए गए चावल सप्लाई किए जाते हैं। उचित मूल्यों की दुकानों में चावलों की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए 22 दिसंबर के अंक में अमर उजाला समाचार पत्र में समाचार प्रकाशित किया गया था। उससे अगले दिन खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग की ओर से उचित मूल्य की दुकान और खनियारा स्थित गोदाम से सैंपल भरकर शिमला भेजे गए थे। इन दोनों सैंपलों की रिपोर्ट इसी सप्ताह विभाग के पास पहुंची है, जबकि इसके बाद इसी महीने भरे गए सैंपलों की रिपोर्ट आनी अभी बाकी है।
खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले के जिला नियंत्रक पुरुषोत्तम सिंह ने बताया कि दो सैंपलों की रिपोर्ट पहुंच चुकी है। चावलों में 0.08 फीसदी कनकी पाई गई है। उन्होंने कहा कि डिपुओं में आने वाले चावलों में कनकी की मात्रा अधिक होने का कारण ज्यादा रिफाइन करना नहीं है। उचित मूल्यों की दुकानों में मिलने वाले चावलों को उचित औसत गुणवत्ता वाले चावल कहते हैं, जो खाने लायक होते हैं। इन चावलों में हल्का पीलापन पॉलिस न होने के कारण होता है।
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