आधुनिक दौर में जहां बाजार प्लास्टिक, लोहे और कांच के उत्पादों से भरे हैं, वहीं समस्तीपुर की महिलाओं ने साधारण लकड़ी को अपनी कला से खास बना दिया है. जिले में चल रहे प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत महिलाओं ने लकड़ी से माल ढुलाई टेंपो का आकर्षक हस्तनिर्मित शोपीस तैयार किया है, जो लोगों का ध्यान खींच रहा है. रोज सड़कों पर दिखने वाला टेंपो जब लकड़ी के खूबसूरत मॉडल के रूप में सामने आया, तो यह रचना हुनर और कल्पनाशक्ति की अनोखी मिसाल बन गई.
समस्तीपुर में डीसी हैंडीक्राफ्ट्स के सहयोग से महिलाओं को विभिन्न हस्तशिल्प उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. इसी दौरान पिंकी कुमारी, किरण कुमारी और उनकी टीम ने बांस की लकड़ी से माल ढुलाई टेंपो का मॉडल तैयार किया.

इसे बनाने में करीब दो से तीन दिन का समय लगा. मॉडल में बारीक नक्काशी के साथ पहियों की बनावट, ड्राइवर सीट और पीछे के माल ढुलाई हिस्से को बेहद सटीक रूप से उकेरा गया है.

तैयार शोपीस इतना आकर्षक है कि पहली नजर में यह समझना मुश्किल होता है कि यह लकड़ी से बना है. इसकी कीमत करीब एक हजार रुपये रखी गई है, जो हस्तनिर्मित उत्पाद के लिहाज से उचित मानी जा रही है.
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इस पहल से महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है और उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है. प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाएं घर पर रहकर सजावटी और उपयोगी वस्तुएं बना रही हैं, जिससे उनकी आय में भी इजाफा हो रहा है. स्थानीय बाजार में इन हस्तशिल्प उत्पादों की मांग बढ़ रही है और लोग पारंपरिक कला को सराह रहे हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसे प्रयासों को निरंतर प्रोत्साहन मिलता रहा, तो समस्तीपुर हस्तशिल्प के क्षेत्र में भी अपनी अलग पहचान बना सकता है. लकड़ी से बना यह टेंपो सिर्फ एक शोपीस नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण और रचनात्मकता का जीवंत उदाहरण बन गया है.
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