Samastipur News: गुड़ उत्पादन के साथ-साथ बुनियादी ढांचे को भी मजबूत किया जा रहा है. राज्य सरकार की ओर से अंतरराष्ट्रीय स्तर की मिट्टी जांच प्रयोगशाला विकसित करने का प्रस्ताव है. जिस पर लगभग 20 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इससे किसानों को वैज्ञानिक सलाह और बेहतर फसल प्रबंधन में मदद मिलेगी. टिश्यू कल्चर लैब को उन्नत कर हर वर्ष लगभग पांच लाख पौधों के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है.
समस्तीपुर जिले में लगभग दस हजार हेक्टेयर भूमि पर गन्ने की खेती होती है और यहां सालाना लाखों टन उत्पादन होता है. यह पहल किसानों की आय बढ़ाने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगी. विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर तकनीक और अनुसंधान से यहां तैयार गुड़ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी अलग पहचान बना सकता है.
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार केंद्र में अत्याधुनिक मशीनों और वैज्ञानिक पद्धतियों का उपयोग कर गुणवत्तायुक्त गुड़ और उससे जुड़े उत्पाद तैयार किए जाएंगे. गुड़ को पारंपरिक उत्पाद तक सीमित न रखकर इसमें सफेद मूसली, गिलोय, सोंठ और अश्वगंधा जैसे औषधीय तत्व मिलाकर हेल्थ प्रोडक्ट के रूप में भी विकसित किया जाएगा. इससे गुड़ की मांग और बाजार मूल्य बढ़ने की संभावना है. साथ ही लघु उद्योगों और किसानों को प्रशिक्षण देकर उन्हें आधुनिक प्रसंस्करण, पैकेजिंग और मार्केटिंग की जानकारी दी जाएगी. संस्थान में देश-विदेश के वैज्ञानिकों के प्रशिक्षण की भी योजना है. जिससे पूसा शोध और नवाचार का प्रमुख केंद्र बन सके. गन्ने के कई उन्नत प्रभेदों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल चुकी है. जिससे क्षेत्र की कृषि क्षमता मजबूत हुई है.
गुड़ उत्पादन के साथ-साथ बुनियादी ढांचे को भी मजबूत किया जा रहा है. राज्य सरकार की ओर से अंतरराष्ट्रीय स्तर की मिट्टी जांच प्रयोगशाला विकसित करने का प्रस्ताव है. जिस पर लगभग 20 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इससे किसानों को वैज्ञानिक सलाह और बेहतर फसल प्रबंधन में मदद मिलेगी. टिश्यू कल्चर लैब को उन्नत कर हर वर्ष लगभग पांच लाख पौधों के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है. विश्वविद्यालय को गन्ना के नाभिकीय, प्रजनक और आधार बीज उत्पादन की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है. जिससे पूरे राज्य में उच्च गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध हो सकें. इसके अलावा 100 बेड के छात्रावास निर्माण की योजना है. जिसमें प्रशिक्षण हॉल और संगोष्ठी कक्ष जैसी सुविधाएं होंगी. यह पहल बिहार को गुड़ उद्योग के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.
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