समस्तीपुर सदर अस्पताल में अत्याधुनिक डायलिसिस सेंटर की शुरुआत हो चुकी है, जहां नियमित रूप से मरीजों का इलाज किया जा रहा है. अस्पताल प्रशासन के अनुसार यहां हर महीने करीब साढ़े सात सौ डायलिसिस सत्र संचालित किए जा रहे हैं, 10 बेड की व्यवस्था वाले इस सेंटर में प्रतिदिन 27 से 30 मरीजों का दो से तीन शिफ्ट में डायलिसिस किया जाता है.
अस्पताल प्रशासन के अनुसार यहां हर महीने करीब साढ़े सात सौ डायलिसिस सत्र संचालित किए जा रहे हैं, 10 बेड की व्यवस्था वाले इस सेंटर में प्रतिदिन 27 से 30 मरीजों का दो से तीन शिफ्ट में डायलिसिस किया जाता है. प्रशिक्षित तकनीशियनों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की देखरेख में आधुनिक मशीनों से इलाज हो रहा है, जिससे मरीजों को सुरक्षित और प्रभावी उपचार मिल रहा है. जिले के दूरदराज प्रखंडों से भी मरीज यहां पहुंच रहे हैं, जिससे साफ है कि यह सुविधा तेजी से भरोसे का केंद्र बन रही है.
मुफ्त सुविधा से आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को राहत
इस डायलिसिस सेंटर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि राशन कार्डधारी मरीजों को पूरी तरह निशुल्क सुविधा दी जा रही है. अस्पताल में इलाज करा रहे मरीज बताते हैं कि उन्हें सप्ताह में 2 से तीन बार मुफ्त डायलिसिस की सुविधा मिल रही है, जिससे आर्थिक बोझ काफी कम हुआ है. सामान्य मरीजों के लिए 1797 रुपये शुल्क निर्धारित है, जो निजी अस्पतालों की तुलना में काफी कम है. निजी संस्थानों में यही प्रक्रिया 3500 से 4000 रुपये तक में होती है. ऐसे में सरकारी अस्पताल की यह पहल आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. यहां आवश्यक दवाएं भी मुफ्त दी जा रही हैं और प्रशिक्षित स्टाफ मरीजों की लगातार निगरानी कर रहा है.
आधुनिक व्यवस्था और सख्त प्रबंधन के साथ संचालन
डायलिसिस सेंटर से जुड़ी एजेंसी के प्रबंधक के अनुसार, एक मरीज के एक सत्र में लगभग एक सौर 25 लीटर आरओ पानी की जरूरत होती है. इसके बावजूद गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जा रहा है. बेड सीमित होने के कारण मरीजों को पहले पंजीकरण कर नंबर लेना पड़ता है. जिन मरीजों की दोनों किडनी प्रभावित हो चुकी है, उनके क्रिएटिनिन स्तर के आधार पर सप्ताह में दो या तीन बार डायलिसिस किया जाता है. स्वास्थ्य विभाग की इस पहल से समस्तीपुर जिले के किडनी रोगियों को बड़ी राहत मिली है. सरकारी स्तर पर उपलब्ध यह सुविधा न सिर्फ इलाज को आसान बना रही है, बल्कि जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है.डिजिटल युग में यह पहल स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है, जो जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई मजबूती दे रहा है.
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