कई बार जानकारी न होने, सही मार्गदर्शन और प्रशिक्षण की कमी के कारण महिलाएं आगे नही बढ़ पाती हैं. उनकी इसी समस्या को देखते हुए लोकल 18 आपके लिए यह महत्पूर्ण खबर लाया है. सहरसा के कृषि महाविद्यालय और वहां कार्यरत महिला वैज्ञानिक डॉ. सुनीता पासवान का मकसद है कि हर महिला आत्मनिर्भर बने और आत्मनिर्भर बनकर परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार सके.
लोकल 18 से खास बातचीत में डॉ. सुनीता पासवान ने बताया कि घर बैठी महिलाएं चाहे पढ़ी-लिखी हों या बिल्कुल अनपढ़ हों वे कृषि विज्ञान केंद्र आकर अपनी रुचि के अनुसार कोई भी कौशल सीख सकती हैं. यहां किसी उम्र, योग्यता या पृष्ठभूमि की बाध्यता नहीं है. सिर्फ महिला में कुछ नया सीखने और जीवन में आगे बढ़ने की इच्छा होनी चाहिए. कृषि विज्ञान केंद्र में महिलाओं को कई तरह के रोजगार उन्मुख प्रशिक्षण उपलब्ध कराए जाते हैं. इसमें मशरूम उत्पादन से लेकर अचार, पापड़, जैम, जेली, गुड़ बनाने से लेकर बत्तख पालन और मुर्गी पालन तक की ट्रेनिंग दी जाती है. इनसे जुड़ी बारीकियां सिखाई और बताई जाती हैं. यहां तक कि तैयार होने के बाद आइटम की मार्केटिंग कैसे करनी है और उसे बाजार में बेचना कैसे है यह भी सिखाया और बताया जाता है.
अगर कोई महिला मशरूम के क्षेत्र में काम करना चाहती है तो यहां पर विशेषज्ञों द्वारा उसे पूरी प्रक्रिया सिखाई जाती है. बीज तैयार करना, मशरूम उगाना, पैकिंग, मार्केटिंग और बिक्री तक के सभी चरण यहां सिखाए जाते हैं. यह ऐसा व्यवसाय है जिसे बहुत कम पूंजी में घर बैठे शुरू किया जा सकता है.
बत्तख पालन और मुर्गी पालन के लिए यहां बत्तख और मुर्गी पालन का विस्तृत प्रशिक्षण दिया जाता है. किस नस्ल की बत्तख लेना बेहतर है, उन्हें क्या खिलाना है, बीमारी से कैसे बचाना है और बाजार तक उत्पाद कैसे पहुंचाना है ये सब जानकारी दी जाती है. कृषि और बागवानी में प्रशिक्षण के भी गुर सिखाए जाते हैं. खेती में रुचि रखने वाली महिलाएं यहां नई और आधुनिक तकनीकें सीख सकती हैं. जैविक खेती, सब्जी उत्पादन, बीज की गुणवत्ता पहचानना, खाद बनाना और कम जगह में अधिक उत्पादन के उपाय बताए जाते हैं. इसके अलावा कुछ महिलाएं अचार, पापड़, जैम, जैली या गुड़ जैसे उत्पाद बनाना चाहती हैं उनके लिए अलग से प्रशिक्षण आयोजित होता है. यहां के एक्सपर्ट उन्हें बाजार में चलने वाले सभी तरीकों की जानकारी देते हैं.
यहां सिर्फ प्रशिक्षण ही नहीं, महिलाओं को रोजगार शुरू करने में जरूरत पड़ने पर कृषि विज्ञान केंद्र की टीम मदद भी करती है. केंद्र का उद्देश्य केवल कौशल देना नहीं बल्कि उन्हें आत्मविश्वास देना है ताकि वे घर बैठकर भी अपनी एक अलग पहचान बना सकें. डॉ. सुनीता पासवान का कहना है महिलाओं में अपार क्षमता है बस उन्हें सही दिशा और मार्गदर्शन की जरूरत होती है और यहां हर महिला को उनके पसंद के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने का पूरा तरीका सिखाया जाता है. उन्होंने बताया कि आज सैकड़ों महिलाएं प्रशिक्षण लेकर अपने घर की आर्थिक स्थिति बेहतर कर रही हैं. उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर अवसर मिले तो हर महिला अपनी जिंदगी बदल सकती है और दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है.
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