पाकुड़ शहर के खनन कार्यालय के पास रुद्रनगर कुर्थीपाड़ा में आयोजित सात दिवसीय श्री श्री 1008 महारुद्र यज्ञ और अखंड हरिनाम संकीर्तन शनिवार को हवन पूर्णाहुति के साथ संपन्न हो गया। इस अवसर पर जिला सहित पश्चिम बंगाल के विभिन्न ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। महारुद्र यज्ञ के अंतिम दिन श्रद्धालुओं में पूजा-अर्चना और यज्ञ मंडप की परिक्रमा को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। बड़े-बूढ़े, पुरुष-महिलाएं और बच्चों सहित सभी ने 108 फेरियां पूरी कीं। वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ आवाहित देवी-देवताओं की पूजा की गई, जिसके उपरांत पूर्णाहुति और महाआरती का आयोजन हुआ। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने महारुद्र यज्ञ में आहुति भी डाली। देवी-देवताओं का आह्वान कर पूजा-अर्चना की गई यज्ञ के आचार्य पंडित संतोष तिवारी ने बताया कि वैदिक रीति-रिवाजों से देवी-देवताओं का आह्वान कर पूजा-अर्चना की गई। प्रतिदिन लगभग दो लाख 51 हजार आहुतियां दी जाती थीं, जिसमें रुद्रीपाठ के मंत्रोच्चारण के साथ हवन किया गया। यह महारुद्र यज्ञ देश में सुख-शांति और महामारी के प्रकोप से बचाव के लिए आयोजित किया गया था। इस सात दिवसीय यज्ञ में बनारस, बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के विद्वान पुरोहितों ने हिस्सा लिया। यज्ञ मंडप में दर्जनों देवी-देवताओं की प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं। पूरे सात दिनों तक प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति देखी गई, जिन्होंने भक्तिभाव से यज्ञ में हिस्सा लिया। इस महारुद्र यज्ञ को सफल बनाने में यज्ञ समिति के अध्यक्ष सह यजमान मुकेश सिंह, राजा भगत, आदित्य तिवारी, मोनी सिंह, सपन और गोलू तिवारी सहित दर्जनों लोगों ने सक्रिय भूमिका निभाई। महाआरती के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद व महाप्रसाद का वितरण किया गया।
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