लाही एक रस चूसने वाला कीट है, जो विशेष रूप से सर्दियों के मौसम में अधिक दिखाई देता है. यह पौधे को कमजोर कर देता है और उसके विकास को प्रभावित करता है. इसके रोकथाम के लिए योग्य या मालाथियान दवा 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें. इसके अलावा थाईमेट 1-जी दाने को पौधों के पास मिट्टी में डालने से भी नियंत्रण किया जा सकता है.
गार्डनिंग के शौकीनों से लेकर फूलों की खेती करने वाले किसान तक सभी लोगों को गुलाब के फूल सबसे अधिक पसंद आते हैं. ये न सिर्फ बगीचे की शोभा बढ़ाते हैं, बल्कि अच्छी आमदनी का जरिया भी हैं. हालांकि, अन्य फसलों की तरह गुलाब के पौधों में भी कई प्रकार के कीट और रोग लगने का खतरा बना रहता है, जिससे किसानों के साथ-साथ ग्राहकों को भी नुकसान उठाना पड़ सकता है.<br />ऐसे में बोकारो स्थित कृषि विज्ञान केंद्र की विशेषज्ञ डॉ. रूपा ने गुलाब के पौधों में लगने वाले प्रमुख कीटों और रोगों की पहचान और उनके रोकथाम के उपायों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है.

डॉ. रूपा ने बताया कि गुलाब के पौधो में सबसे गंभीर समस्या दीमक की होती है, जो पौधे की जड़ों पर आक्रमण करती है. इससे पौधे अचानक मुरझा जाते हैं और मर भी सकते हैं.<br />इससे बचाव के लिए पौधा लगाते समय गड्ढे में 5 ग्राम डासवान दाने का प्रयोग करना चाहिए, जिससे दीमक का खतरा कम होता है और पौधा सुरक्षित रहता है.

शाखा विगलन रोग में गुलाब के पौधों की कटी हुई शाखाएं काली पड़कर सूखने लगती हैं. अगर समय रहते इनका उपचार न किया जाए तो पूरा पौधा मर सकता है. ऐसे में लक्षण दिखाई देते ही कटे हुए भाग पर वेनगार्ड या वेविस्टीन दवा का पेस्ट लगाने से नुकसान को रोका जा सकता है.
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लाही एक रस चूसने वाला कीट है, जो विशेष रूप से सर्दियों के मौसम में अधिक दिखाई देता है. यह पौधे को कमजोर कर देता है और उसके विकास को प्रभावित करता है.<br />इसके रोकथाम के लिए योग्य या मालाथियान दवा 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें. इसके अलावा थाईमेट 1-जी दाने को पौधों के पास मिट्टी में डालने से भी नियंत्रण किया जा सकता है.

पाउडरी मिल्ड्यू रोग में गुलाब की शाखाओं और पत्तियों पर सफेद चूर्ण जैसी परत जम जाती है. पत्तियां पीली हो जाती हैं और कलियों का विकास रुक जाता है. इस रोग के नियंत्रण के लिए घुलनशील गंधक 2 ग्राम प्रति लीटर या कैराथेन 1 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने से समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है.

काला धब्बा रोग में गुलाब की पत्तियों पर काले धब्बे पड़ जाते हैं, जिससे पौधे की सुंदरता खत्म हो जाती है और वह बेरंग दिखने लगता है. ऐसे में इसके उपचार के लिए क्लोरोथेलोनिल 2 ग्राम, या ब्लिटाक्स/ डाइथेन एम-45 के 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए. इससे काला धब्बा रोग की समस्या से बचाव होता है.
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