यह रोपवे रोहतास प्रखंड मुख्यालय से प्रसिद्ध चौरासन मंदिर तक बनाया गया है. स्थानीय लोगों को भरोसा था कि नए साल की शुरुआत के साथ ही यहां पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी और होटल, दुकान, गाइड, वाहन और छोटे-मोटे कारोबार के जरिए गांव के युवाओं को यहीं रोजगार मिलेगा. करीब 13 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस योजना को लेकर आसपास के गांवों में खासा उत्साह था, लेकिन ट्रायल के दौरान हुए हादसे ने पूरे माहौल को सन्नाटे में बदल दिया है.
ट्रायल के समय आ रही थी तेज आवाज
घटना के प्रत्यक्षदर्शी और स्थानीय निवासी रामबली सिंह बताते हैं कि ट्रायल के वक्त अचानक तेज आवाजें आने लगीं और देखते ही देखते एक बड़ा सपोर्टिंग टावर जमीन पर गिर गया. इसके बाद वहां मौजूद कर्मचारी और ग्रामीण डर के मारे इधर-उधर भागने लगे. कुछ ही पलों में खुशी और उम्मीद का माहौल अफरा-तफरी में बदल गया.
रोजगार करने का सपना टूटा
वहीं, दूसरे स्थानीय युवक अभिषेक कुमार टूटे हुए रोपवे की संरचना को धूल भरी आंखों से निहारते नजर आए. उन्होंने कहा कि खासकर उनके जैसे युवाओं के लिए यह हादसा बेहद निराशाजनक है. उन्हें उम्मीद थी कि नए साल में रोहतास प्रखंड के लिए यह परियोजना नई सुबह लेकर आएगा. जहां पर्यटकों की भीड़ होगी और उन्हें भी 2 पैसे कमाने का मौका मिलेगा, लेकिन एक ही रात में उनका यह सपना टूट गया.
सरकार से अभी भी है लोगों को उम्मीदें
एक अन्य स्थानीय युवक ने बताया कि गांव के लोगों को भरोसा था कि रोपवे शुरू होने के बाद उन्हें या उनके बच्चों को रोजगार के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा. यहीं चाय-नाश्ते की दुकान, छोटी दुकानें या अन्य काम करके परिवार चलाया जा सकेगा. अब यह सपना सपना ही रह गया है. हालांकि लोगों को अभी भी थोड़ी उम्मीद है कि अगर सरकार इस मामले को गंभीरता से ले और दोषियों पर कार्रवाई करे, तो रोपवे को सुधार के बाद दोबारा शुरू किया जा सकता है.
वहीं, स्थानीय युवा प्रिंस अंसारी ने कहा कि अक्सर सपने नींद खुलने के बाद टूटते हैं, लेकिन रोहतास में रोपवे का सपना तो उससे भी तेज टूट गया. उन्होंने बताया कि एक युवा होने के नाते उन्होंने भी सोचा था कि रोपवे शुरू होते ही वह यहां अपना छोटा रोजगार शुरू करेंगे, लेकिन एक झटके में सब कुछ तबाह हो गया.
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.