कई पर्यटकों का मानना है कि बीते कुछ वर्षों में गंगा की स्थिति में आंशिक सुधार जरूर हुआ है. कुछ घाटों पर पानी अपेक्षाकृत साफ दिखाई देता है और प्लास्टिक कचरा पहले की तुलना में कम नजर आता है. घाटों पर नियमित सफाई और कुछ स्थानों पर चेतावनी बोर्ड भी लगाए गए हैं, जो लोगों को गंदगी न फैलाने का संदेश देते हैं.
घाटों पर पहले जैसी सफाई
लोकल 18 के साथ बातचीत के दौरान भारत से ताल्लुक रखने वाली नुपुर, जो कई वर्षों से विदेश में रह रही हैं, हाल ही में ऋषिकेश पहुंची. उनका कहना है कि लंबे समय बाद यहां आने की उत्सुकता थी, लेकिन गंगा की स्थिति उन्हें पहले जैसी ही महसूस हुई.
उनके अनुसार, घाटों पर अभी भी पहले जैसी सफाई दिखती है. वहीं ऋषिकेश आए जितेंद्र का अनुभव इससे अलग रहा. उन्होंने बताया कि गंगा स्नान के दौरान उन्हें विशेष आनंद की अनुभूति हुई. उनके अनुसार पानी साफ था और स्नान करते समय किसी तरह की असहजता महसूस नहीं हुई.
घाटों का सौंदर्य बढ़ा
पश्चिम बंगाल से आए गौतम पहले भी दो बार ऋषिकेश आ चुके हैं. तीसरी बार यहां पहुंचने पर उन्हें शहर पहले से ज्यादा व्यवस्थित और सुंदर लगा. उनका कहना है कि घाटों का सौंदर्य बढ़ा है और कुछ जगहों पर गंगा अब भी उतनी ही साफ दिखाई देती है, जितनी पहले हुआ करती थी. हालांकि वे यह भी मानते हैं कि कुछ हिस्सों में सुधार की गुंजाइश अब भी बनी हुई है.
पहली बार ऋषिकेश आए श्यामदेव ने यहां के घाटों की तारीफ की. उनके अनुसार, घाटों की बनावट और आसपास का वातावरण काफी आकर्षक है. उन्होंने कहा कि गंगा का पानी भी उन्हें साफ लगा और घाटों पर बिताया गया समय उनके लिए यादगार रहा. उनका मानना है कि यदि सफाई पर इसी तरह ध्यान दिया जाए, तो ऋषिकेश की पहचान और मजबूत हो सकती है.
Discover more from India News
Subscribe to get the latest posts sent to your email.