गार्डनर राम सागर ने बताया कि मून कैक्टस का वैज्ञानिक नाम जिम्नोकैलिशियम मिहानोविची है. यह कैक्टस प्राकृतिक रूप से हरा नहीं होता, बल्कि इसके रंग चमकीले होते हैं. इसमें क्लोरोफिल नहीं होता, जो पौधों को खुद खाना बनाने में मदद करता है. इसी कमी की वजह से मून कैक्टस अकेले जीवित नहीं रह सकता.
रंग बिरंगा मून कैक्टस दिखने में जितना आकर्षक होता है, उतनी ही अनोखी इसकी कहानी भी होती है. घर, ऑफिस या गार्डन की शोभा बढ़ाने वाला यह पौधा पहली नजर में सबका ध्यान खींच लेता है. लाल, पीले, गुलाबी और नारंगी रंगों में दिखने वाला मून कैक्टस असल में एक खास तरह का कैक्टस है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसकी जिंदगी पूरी तरह से दूसरे पौधे पर निर्भर होती है. यही वजह है कि इसे प्रकृति का एक अनोखा चमत्कार माना जाता है.

गार्डनर राम सागर ने बताया कि मून कैक्टस का वैज्ञानिक नाम जिम्नोकैलिशियम मिहानोविची है. यह कैक्टस प्राकृतिक रूप से हरा नहीं होता, बल्कि इसके रंग चमकीले होते हैं. इसमें क्लोरोफिल नहीं होता, जो पौधों को खुद खाना बनाने में मदद करता है. इसी कमी की वजह से मून कैक्टस अकेले जीवित नहीं रह सकता. इसे हमेशा किसी दूसरे हरे कैक्टस पर ग्राफ्ट किया जाता है. ऊपर का रंगीन हिस्सा मून कैक्टस होता है और नीचे का हरा हिस्सा उसका सहारा बनता है.

मून कैक्टस की पूरी जिंदगी स्टॉक प्लांट यानी दूसरे कैक्टस से जुड़ी होती है. नीचे लगा हरा कैक्टस फोटोसिंथेसिस करके भोजन बनाता है और वही भोजन मून कैक्टस तक पहुंचता है. अगर नीचे वाला पौधा कमजोर हो जाए या सूख जाए, तो ऊपर का रंगीन मून कैक्टस भी कुछ ही समय में मर जाता है. इसलिए इसे उगाने और संभालने में दोनों पौधों का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है.
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आज के समय में मून कैक्टस इंडोर प्लांट के रूप में काफी लोकप्रिय है. छोटे गमलों में लगा यह पौधा बालकनी, खिड़की या टेबल पर बेहद सुंदर लगता है. इसकी रंगीन बनावट घर के माहौल को जीवंत बना देती है. खास बात यह है कि इसे ज्यादा जगह की जरूरत नहीं होती. कम देखभाल में भी यह लंबे समय तक अच्छा दिखता है. यही कारण है कि शहरी घरों में इसकी मांग तेजी से बढ़ी है.

मून कैक्टस की सही देखभाल के लिए धूप और पानी का संतुलन जरूरी है. इसे सीधी तेज धूप में नहीं रखना चाहिए, बल्कि हल्की धूप या ब्राइट इनडायरेक्ट लाइट बेहतर होती है. ज्यादा पानी इसकी जड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है. हफ्ते में एक बार या मिट्टी सूखने पर ही पानी देना चाहिए. अच्छी ड्रेनेज वाली मिट्टी का इस्तेमाल करने से पौधा स्वस्थ रहता है और सड़न से बचा रहता है.

मून कैक्टस के खराब होने की सबसे बड़ी वजह ज्यादा पानी देना है. जरूरत से ज्यादा नमी से नीचे वाला कैक्टस गल सकता है, जिससे पूरा पौधा खराब हो जाता है. बरसात के मौसम में इसे खास सावधानी की जरूरत होती है. अगर गमले में पानी जमा हो जाए, तो तुरंत निकाल देना चाहिए. पौधे की जड़ें सूखी और मजबूत रहें, तभी मून कैक्टस लंबे समय तक जिंदा और सुंदर बना रहता है.

रंग बिरंगा मून कैक्टस खूबसूरती और सीख दोनों का अनोखा मेल है. यह न सिर्फ घर की शोभा बढ़ाता है, बल्कि प्रकृति के संतुलन और आपसी निर्भरता का महत्व भी समझाता है. सही देखभाल और थोड़े से ध्यान से यह पौधा लंबे समय तक आपके घर को सजाए रख सकता है. अगर आप कम मेहनत में सुंदर और खास पौधा चाहते हैं, तो मून कैक्टस एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है.
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