नींबू की बागवानी से शानदार मुनाफा
तारकेश्वर सिंह ने डेमोंस्ट्रेशन के तौर पर नींबू के करीब 20 पेड़ लगाए हैं. जैविक तरीके से की गई देखरेख का नतीजा यह है कि एक-एक नींबू के पेड़ से 500 तक फल मिल रहे हैं. नींबू साल में दो बार फल देता है, जिससे उन्हें सालाना करीब एक लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा हो जाता है. इसके अलावा वे आम की बागवानी भी करते हैं, जिससे एक सीजन में लगभग 10 लाख रुपये तक की बिक्री कर लेते हैं.
चावल का पानी बना वरदान
तारकेश्वर सिंह बताते हैं कि वे हर बार खाना बनाने से पहले भीगे चावल का पानी बचा लेते हैं और हफ्ते में एक बार पौधों की जड़ों में डालते हैं. यह पानी नींबू के साथ-साथ सब्जियों में भी इस्तेमाल किया जाता है. इससे पौधों की बढ़त तेज होती है, फूल और फल अच्छी संख्या में आते हैं और पौधे लंबे समय तक स्वस्थ रहते हैं.
कई फसलों में असरदार उपाय
यह देसी नुस्खा टमाटर, मिर्च, बैंगन, धनिया, पालक, लेट्यूस, संतरा जैसी फसलों में भी बेहद फायदेमंद साबित हो रहा है. टमाटर और मिर्च में फूल और फल दोनों की संख्या बढ़ती है, बैंगन में उत्पादन बेहतर होता है, वहीं पत्तेदार सब्जियां ज्यादा हरी और घनी उगती हैं. चावल का पानी कीट, फंगस और ज्यादा खाद से भी बचाव करता है.
पोषक तत्वों से भरपूर प्राकृतिक खाद
चावल के पानी में स्टार्च, फॉस्फोरस, पोटैशियम और कई जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्व होते हैं, जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाते हैं और जड़ों को मजबूत बनाते हैं. यही वजह है कि यह पूरी तरह से नींबू और अन्य फसलों पर असर करता है.
किसानों के लिए प्रेरणा
तारकेश्वर सिंह का यह प्रयोग साबित करता है कि लगातार रासायनिक मुक्त खेती न सिर्फ पर्यावरण के लिए सुरक्षित है, बल्कि किसानों के लिए बेहद फायदेमंद भी है. किचन गार्डन हो या खेत, अगर किसान प्राकृतिक तरीकों को अपनाएं, तो कम खर्च में बेहतर पैदावार और अधिक मुनाफा संभव है.
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