Ghinauchi Dham: रीवा में घिनौची धाम धरती पर किसी अद्भुत स्थान से कम नहीं. इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक दोनों मान्यता है. इस जगह के बारे में आज भी कम लोगों को पता है. इसे अंग्रेजों ने जब खोजा था, तो भी दंग रह गए थे. अब यहां यूपी से कुछ पर्यटक आने लगे हैं. यहां महादेव भी विराजमान हैं, जिनका 12 महीने जलाभिषेक हो रहा है.
कहां होता है महादेव का 12 महीने लगातार जलाभिषेक?
यहां प्राकृतिक झरने का श्वेत जल भगवान भोलेनाथ का 12 महीने निरंतर जलाभिषेक करता है, जिसे देखना रोमांचकारी है. यहां दो झरने भी बहते हैं, जिनका जल पूरे वर्ष यहां पर स्थित एक बहुत प्राचीन शिवलिंग का जलाभिषेक करता रहता है, जो दर्शनीय है. बता दें कि जुलाई से सितंबर के बीच यहां दो जल प्रपातों का संगम देखने को मिलता है. इसके अलावा, प्राचीन शिवलिंग और शैल चित्र भी हैं.
200 फीट नीचे दो झरनों का संगम कहां?
यहां की खास बात जो इसे विशेष बनाती है, वो है धरती से 200 फीट नीचे दो अद्भुत जल प्रपातों का संगम, जिसका आनंद जुलाई से सितंबर माह के मध्य लिया जा सकता है. साथ ही अति प्राचीन शिवलिंग और यहां पहाड़ियों में उकेरे प्राचीन शैल चित्र भी हैं. चट्टानों में उकेरे गए प्रागैतिहासिक शैल चित्र, जो इस क्षेत्र की गौरव गाथा भी बताते हैं. दो अद्भुत सर्पिलाकार चट्टानें अपने आप में अद्भुत हैं. इसके अलावा, मां पार्वती की साक्षात दिव्य प्रतिमा भी मौजूद है.
इस जगह को लेकर पौराणिक मान्यता
इसको लेकर कई पौराणिक कहानियां हैं. कहा जाता है कि भगवान शिव और पार्वती विचरण कर रहे थे, तभी देवी पार्वती को इस वन में रुकने का मन हुआ. झरने में स्नान करने की मंशा जाहिर की थी. फिर देवी पार्वती और भगवान शिव ने झरने में स्नान कर यहां की प्राकृतिक सुंदरता में ध्यान मग्न हो गए थे. 12 माह यहां पर लोग बराबर आते रहते हैं. यहां की प्राकृतिक सुंदरता आने वालों का मन मोह लेती है. मध्य प्रदेश के अलावा अब यहां उत्तर प्रदेश के पर्यटक भी आने लगे हैं.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें
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