विवाह का आश्वासन देकर शारीरिक संबंध बनाने और बाद में कुंडली न मिलने का हवाला देकर शादी से इनकार करने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा है कि ऐसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 लागू हो सकती है, जो छलपूर्वक यौन संबंध को दंडनीय बनाती है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति स्वर्णा कांत शर्मा ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए की।
न्यायमूर्ति स्वर्णा कांत शर्मा ने यह टिप्पणी उस आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए की, जिस पर एक महिला से शारीरिक संबंध बनाने और बाद में जन्मपत्री न मिलने का हवाला देकर शादी से इनकार करने का आरोप है। न्यायाधीश ने कहा कि आरोपी ने बार-बार यह आश्वासन दिया कि विवाह में कोई बाधा नहीं है, जिसमें कुंडली मिलान भी शामिल है। इसी आधार पर एक अवधि तक शारीरिक संबंध स्थापित किए गए। ऐसे में इस चरण पर उसका आचरण बीएनएस की धारा 69 के तहत अपराध को आकर्षित करता है।
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