Palak Ka Kapa Recipe : उत्तराखंड की पारंपरिक पहाड़ी सब्जी कापा (काफली) सर्दियों में खास तौर पर बनाई जाती है. यह पालक, सरसों के साग जैसी हरी पत्तेदार सब्जियों से तैयार होती है. सरसों के तेल में लहसुन और जख्या का तड़का लगाकर इसे धीमी आंच पर पकाया जाता है. स्वाद और सेहत से भरपूर यह व्यंजन शरीर को गर्म रखने में मदद करता है और मंडुए या गेहूं की रोटी के साथ बेहद स्वादिष्ट लगता है.
लोकल 18 के साथ बातचीत के दौरान गृहिणी रुचि ने बताया कि कापा बनाने की सबसे खास बात यह है कि इसमें पूरी तरह प्राकृतिक और स्थानीय सामग्री का इस्तेमाल किया जाता है. इस व्यंजन को बनाने के लिए मुख्य रूप से पालक, सरसों का साग या पहाड़ों में मिलने वाली अन्य हरी पत्तेदार सब्जियों का प्रयोग किया जाता है. सबसे पहले इन हरी सब्जियों को अच्छी तरह धोकर बारीक काट लिया जाता है. इसके बाद कड़ाही में सरसों का तेल गर्म किया जाता है, जो इस व्यंजन को खास पहाड़ी स्वाद देता है. तेल गर्म होने के बाद इसमें लहसुन और जख्या का तड़का लगाया जाता है. जख्या उत्तराखंड का एक पारंपरिक मसाला है जो स्वाद और खुशबू दोनों को बढ़ाने का काम करता है.
जब तड़का तैयार हो जाता है तब इसमें कटी हुई हरी सब्जियां डालकर धीमी आंच पर पकाया जाता है. इसमें हल्दी और नमक मिलाकर सब्जी को अच्छी तरह भूनने दिया जाता है. कुछ लोग इसमें हल्का सा चावल का आटा या बेसन भी मिलाते हैं जिससे सब्जी की ग्रेवी थोड़ी गाढ़ी हो जाती है. कापा को धीमी आंच पर पकाने से इसका स्वाद और भी ज्यादा बढ़ जाता है. यह व्यंजन देखने में साधारण लग सकता है लेकिन इसका स्वाद बेहद गहरा और पारंपरिक होता है.कापा को आमतौर पर गर्मागर्म रोटी, खासकर मंडुए की रोटी या गेहूं की रोटी के साथ परोसा जाता है. पहाड़ों में यह व्यंजन रोजमर्रा के भोजन का हिस्सा होने के साथ-साथ खास मौकों पर भी बनाया जाता है.
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