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Masoor Dal Recipe: पहाड़ों की वादियों में सिर्फ कुदरती खूबसूरती ही नहीं, बल्कि यहां का पारंपरिक खान-पान भी अपनी एक अलग पहचान रखता है. साधारण सी दिखने वाली मसूर की दाल जब पहाड़ी रसोई में ‘डुबके’ का रूप लेती है, तो इसका स्वाद किसी शाही व्यंजन से कम नहीं लगता. सिलबट्टे पर पिसी दाल और लोहे की कढ़ाई में धीमी आंच पर पकते ये डुबके आज भी पुराने लोगों को उनके बचपन की याद दिला देते हैं. आखिर क्या है इस डिश को बनाने का खास तरीका.
कैसे बनाएं मसूर के चटपटे डुबके
मसूर के डुबके बनाने के लिए सबसे पहले मसूर की दाल को अच्छी तरह साफ कर कुछ घंटों के लिए भिगो दिया जाता है. जब दाल फूल जाती है, तो उसे सिलबट्टे या मिक्सर में पीसकर गाढ़ा पेस्ट तैयार किया जाता है. पेस्ट जितना अच्छा और मुलायम होगा, डुबके उतने ही स्वादिष्ट बनेंगे. इसके बाद कढ़ाई में तेल गरम किया जाता है और उसमें यह पेस्ट डाल दिया जाता है. अब इसमें स्वाद अनुसार नमक, हल्दी, धनिया, लहसुन और अन्य मसाले मिलाए जाते हैं. धीमी आंच पर इसे लगातार चलाते हुए पकाया जाता है ताकि पेस्ट अच्छे से पक जाए और उसमें गाढ़ापन आ जाए.
बदलते समय के साथ कम हुई खेती और स्वाद
ग्रामीण महिला मुन्नी जोशी ने बताया कि गर्मियों के दिनों में मसूर के डुबके विशेष रूप से खाए जाते थे. उनका कहना है कि पहाड़ों में पहले यह व्यंजन लगभग हर घर में बनता था और लोग बड़े चाव से खाते थे. उस समय गांवों में मसूर की खेती भी खूब होती थी, इसलिए यह डिश आसानी से तैयार हो जाती थी. उन्होंने यह भी कहा कि धीरे-धीरे समय के साथ खेती कम होती गई और कई जगहों पर पूरी तरह बंद हो गई. खेती के घटने का असर पहाड़ी खान-पान पर भी पड़ा और मसूर के डुबके बनना भी कम हो गया.
दही और मट्ठे का तड़का बढ़ाता है जायका
मुन्नी जोशी ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि उनके जमाने में डुबकों में दही या कभी-कभी मट्ठा भी मिलाया जाता था. इससे इसका स्वाद और भी बढ़ जाता था और हल्की खटास इसे खास बना देती थी. दही या मट्ठा मिलाने से डुबके और ज्यादा पौष्टिक भी बन जाते थे. इसे अक्सर गरमा-गरम चावल या मंडुए की रोटी के साथ परोसा जाता है. इसका स्वाद साधारण दाल से अलग और ज्यादा गाढ़ा होता है, जो इसे विशेष बनाता है.
एक बार जरूर करें ट्राई
अगर आप साधारण दाल खाकर बोर हो चुके हैं, तो एक बार पहाड़ी मसूर के डुबके जरूर बनाकर देखें. यह सिर्फ एक व्यंजन नहीं, बल्कि पहाड़ों की परंपरा और स्वाद की पहचान है. आज भले ही यह हर घर में न बनता हो, लेकिन जहां भी बनता है, वहां इसका स्वाद लोगों को पुराने समय की याद दिला देता है. यह डिश प्रोटीन से भरपूर होने के साथ-साथ सुपाच्य भी होती है, जो सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है.
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सीमा नाथ पांच साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. शाह टाइम्स, उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम किया है. वर्तमान में मैं News18 (नेटवर्क18) के साथ जुड़ी हूं, जहां मै…और पढ़ें
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