Bilaspur News: जब भी भात बड़ी खाने का मन हो, तो कड़ाही में तेल गर्म करें. तेल के पूरी तरह गर्म होने पर भात बड़ी को कड़ाही में डालकर कुरकुरा होने तक तल लें और फिर छानकर निकाल लें. इसे पापड़ की तरह खाने के साथ या स्नैक्स के तौर पर खा सकते हैं.
छत्तीसगढ़ में वर्षों से भात बड़ी बनाने की परंपरा चली आ रही है. रात के बचे हुए पके चावल को एक बर्तन में लेकर उसमें भुना हुआ जीरा, हल्दी पाउडर, मिर्च पाउडर और गरम मसाला मिलाया जाता है. सभी मसालों को अच्छे से मिक्स करने के बाद चावल से छोटे-छोटे आकार की बड़ी बनाई जाती है.
धूप में सुखाकर होती है तैयार
बनाई गई बड़ी को धूप में एक से दो दिन तक अच्छी तरह सुखाया जाता है. जब बड़ी पूरी तरह सूख जाती है, तो इसे एयरटाइट डिब्बे में बंद कर सुरक्षित रख लिया जाता है. इस तरीके से भात बड़ी कई दिनों तक खराब नहीं होती और जरूरत के समय आसानी से इस्तेमाल की जा सकती है.
तलकर बनती है कुरकुरी और चटपटी
जब भी भात बड़ी खाने का मन हो, कड़ाही में तेल गर्म किया जाता है. तेल के कड़क होने पर बड़ी को तेल में डालकर कुरकुरा होने तक तला जाता है और फिर छानकर निकाल लिया जाता है. इसे पापड़ की तरह भोजन के साथ या ऐसे ही स्नैक्स के रूप में खाया जाता है.
बच्चों के लिए हेल्दी और देसी स्नैक्स
भात बड़ी बच्चों के लिए एक हेल्दी स्नैक्स विकल्प मानी जाती है. इसका देसी स्वाद बच्चों को इतना पसंद आता है कि वे चिप्स और कुरकुरे की ओर देखना भी भूल जाते हैं. ठंड के मौसम में घर पर बनाई गई भात बड़ी स्वाद, सेहत और परंपरा तीनों का बेहतरीन संगम है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
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