Famous Sweet Shops Jamshedpur: जमशेदपुर के टैगोर सोसाइटी के पास लगने वाला धीरज का छोटा सा स्टॉल आज बड़े ब्रांड्स को टक्कर दे रहा है. हजारीबाग के प्रसिद्ध चौपारण स्टाइल में बनी मिठाइयों के लिए मशहूर इस दुकान पर महज ₹10 में शुद्ध छेने का खीर मोहन और 4 घंटे की मेहनत से तैयार मलाईदार राबड़ी मिल रही है. अपनी खास उड़द दाल की कुरकुरी इमरती और मात्र ₹50 के शाही स्वीट प्लेटर के दम पर धीरज पिछले 10 वर्षों से शहरवासियों की जुबान पर देसी स्वाद का जादू बिखेर रहे हैं.
चौपारण की परंपरा और शुद्धता का संगम
धीरज के स्टॉल की सबसे बड़ी खासियत है शुद्धता और देसीपन. धीरज बताते हैं कि वे अपनी मिठाइयों में किसी भी तरह की मिलावट के सख्त खिलाफ हैं. उनका मानना है कि असली स्वाद केवल ताजी सामग्री और मेहनत से ही आता है. यहां का खीर मोहन ताजे छेने से तैयार किया जाता है. धीरज के अनुसार यदि इसमें थोड़ी भी मिलावट की जाए तो छेना अपनी कोमलता खो देता है. यही कारण है कि इनका खीर मोहन इतना रसीला और नरम होता है कि मुंह में जाते ही घुल जाता है. इसकी कीमत महज ₹10 प्रति पीस.
मलाईदार राबड़ी का विज्ञान
असली राबड़ी बनाना धैर्य का काम है. धीरज दूध को धीमी आंच पर लगातार 4 से 5 घंटे तक पकाते हैं. इस दौरान दूध के ऊपर जमने वाली मलाई की परतों को धीरे-धीरे समेटा जाता है. तब जाकर वह गाढ़ी और दानेदार राबड़ी तैयार होती है जो बाजार की सामान्य राबड़ी से कोसों आगे है.
कुरकुरी इमरती, स्टॉल की असली पहचान
हालांकि लोग यहां खीर मोहन और राबड़ी के लिए आते हैं, लेकिन उड़द दाल की इमरती इस स्टॉल की सिग्नेचर डिश है. ताजे घोल से कढ़ाही में सुनहरी-नारंगी आकृतियां उकेरती इमरती जब चाशनी में डूबकर बाहर आती है, तो उसकी खुशबू पूरे इलाके में फैल जाती है. बाहर से कुरकुरी और अंदर से रसीली इस इमरती को ग्राहक अक्सर चाय के साथ या खास मिठाई के तौर पर खाना पसंद करते हैं.
पॉकेट फ्रेंडली स्वीट प्लेटर
महंगाई के दौर में भी धीरज ने अपनी मिठाइयों की कीमत को आम आदमी की पहुंच में रखा है. ग्राहकों के लिए यहां कुछ खास कॉम्बिनेशन (प्लेटर) उपलब्ध हैं. ₹50 का स्पेशल प्लेटर. इसमें एक पीस इमरती, एक खीर मोहन और ऊपर से लजीज राबड़ी परोसी जाती है. ₹50 का कॉम्बो में दो इमरती के साथ भरपूर राबड़ी का आनंद लिया जा सकता है.
समय और स्थान
यदि आप भी इस पुराने देसी स्वाद का अनुभव लेना चाहते हैं, तो जमशेदपुर के टैगोर सोसाइटी के पास सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे के बीच धीरज के स्टॉल पर पहुंच सकते हैं. यहां आने वाले ग्राहक सिर्फ मिठाई ही नहीं खाते, बल्कि धीरज की मेहनत और चौपारण की परंपरा से जुड़ी उस मिठास का अनुभव लेकर जाते हैं जो ब्रांडेड दुकानों की चकाचौंध में कहीं खो गई है. यही कारण है कि यहां एक बार आने वाला ग्राहक बार-बार खींचा चला आता है.
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मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें
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