चिकन को सखुआ के पत्तों में लपेटकर मिट्टी से बने चूल्हे में लकड़ी की आंच पर धीमी आंच में लगभग आधा घंटा पकाया जाता है, जिससे न सिर्फ एक अलग स्वाद मिलता है, बल्कि सेहत के लिए भी फायदेमंद है.
आसपास वाले भी स्वाद के दीवाने
इस खास स्वाद और तरीके की वजह से दूर-दूर से लोग इस व्यंजन का स्वाद लेने के लिए आते हैं. अब यह केवल आदिवासियों का नहीं, बल्कि जिले के सभी लोगों और आस-पास के राज्यों के लोगों का भी पसंदीदा व्यंजन बन गया है, जो इन दिनों जिले में काफी चलन में है. इससे स्वाद में चार चांद लग जाता है.
खाते हैं, पैक कराकर ले जाते हैं
स्टॉल के संचालक संदीप कुमार साहू ने लोकल 18 को बताया कि पहले वे सिर्फ चिकन बेचते थे, फिर ग्राहकों ने चिकन पतपोड़ा के बारे में बताया और इसे भी बेचने का आग्रह करने लगे. तो एक दिन उन्होंने घर पर खुद से चिकन पतपोड़ा बनाकर देखा तो बहुत स्वादिष्ट लगा. इसके बाद उन्होंने इसे दुकान में बनाकर बेचने का फैसला किया. और लोगों को इसका स्वाद बहुत पसंद आ रहा है, ज्यादातर लोग इसे पैक कराकर ले जाते हैं.
ऐसे तैयार होता है यह खास चिकन
इस व्यंजन को ऑर्डर पर तैयार किया जाता है. ऑर्डर मिलने के बाद खुद चिकन काटकर चिकन पतपोड़ा तैयार किया जाता है. चिकन को धोने के बाद सखुआ के पत्ते पर रखा जाता है, फिर उसमें हरी मिर्च, प्याज, लहसुन, अदरक का पेस्ट, सरसों का तेल, नमक, स्वादानुसार चिकन मसाला आदि डालकर अच्छी तरह मिलाया जाता है. फिर उसे सखुआ के पत्तों से सिलकर पैक किया जाता है. फिर टीना में लपेटकर लकड़ी के चूल्हे में लगभग 30 मिनट तक पकाया जाता है. उसके बाद ग्राहकों को परोसा जाता है.
इतनी है कीमत, यह है टाइमिंग
चिकन पतपोड़ा की कीमत की बात करें तो यह प्रति किलो 360 रुपए की दर से मिलता है. संदीप चिकन खुद से काटकर और बनाकर देते हैं, उसके लिए कोई अलग पैसा या सामान नहीं लेते हैं. बता दें यह दुकान गुमला शहर के पालकोट रोड में जियो ऑफिस के पास पतपोड़ा चिकन के नाम से चल रही है. यह दुकान रोज सुबह 8 बजे से रात लगभग 8.30 बजे तक खुली रहती है. दुकान में जिले के अलग-अलग इलाकों के अलावा रांची, लोहरदगा आदि जगहों के लोग भी आते हैं.
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