पिथौरागढ़ जिले के धारचूला स्थित दारमा घाटी में चार साल बाद दुर्लभ हिम तेंदुआ नजर आया है। इससे वन्यजीव प्रेमियों में खुशी है। उच्च हिमालय में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए कार्य कर रही हिडन हिमालयाज ऑफ उत्तराखंड की टीम ने हिम तेंदुए को अपने कैमरे में कैद किया है।
शीतकाल के समय स्थानीय युवाओं की टीम हिडन हिमालयाज ऑफ उत्तराखंड विषम परिस्थितियों में दारमा घाटी के उच्च हिमालय में संरक्षित हिम तेंदुआ सहित अन्य वन्य जीवों को बचाने के लिए पिछले सात वर्षों से काम कर रही है। टीम के जयेंद्र सिंह फिरमाल ने बताया कि दारमा घाटी में कई दुर्लभ वन्यजीवों की मौजूदगी है जिसमें हिम तेंदुआ खास है।
उन्होंने बताया कि टीम ने दो फरवरी 2022 को सबसे पहले हिम तेंदुए की वीडियो ओर फोटो लेने में सफलता पाई थी। फिर से टीम को यह सफलता हाथ लगी है। उन्होंने बताया कि 26 जनवरी 2026 को दारमा घाटी हिम तेंदुए और स्नो कॉक की तस्वीर ली गई। उन्होंने बताया कि हिम तेंदुआ 3000 से 4500 मीटर की ऊंचाई पर रहने वाला एकमात्र वन्यजीव है। इसकी पारिस्थितिकी तंत्र की मजबूती में महत्वपूर्ण भूमिका है। वहीं स्नो कॉक विलुप्ति की कगार पर है। दारमा में इनकी मौजूदगी सुखद है। टीम में नितेश सिंह, असमित सिंह, भीम सिंह, दिनेश सिंह आदि शामिल हैं।
दारमा में मिलते हैं दुर्लभ वन्य जीव
जयेंद्र सिंह फिरमाल ने बताया कि दारमा घाटी हिम तेंदुआ के साथ ही ब्लू शिप, हिमालयन थार, हिमालयन मोनाल, हेडेड वल्चर, स्नो कॉक, चुकाकार, फिंच, काला भालू आदि दुर्लभ वन्य जीवों का डेरा है।
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