Ranchi Savitri Life Changed With Aajivika Didi Yojna: रांची की सावित्री ने अजीविका दीदी योजना से जुड़कर इस कदर सफलता हासिल की कि आज वे अपने पूरे घर को संभाल रही हैं. खुद पढ़ रही हैं, अपने भाई-बहनों को पढ़ा रही हैं और घर खर्च में भी हाथ बंटाती हैं.
मुझे मुफ्त में कई राज्यों में जाने का मौका मिलता है. वहां स्टॉल लगाने का मौका मिलता है. ऐसे में हमारे कस्टमर भी बनते चले जाते हैं. कस्टमर के लिए सोचना नहीं पड़ता. आज आलम यह है कि घर का खर्च से लेकर अपनी पढ़ाई और अपने भाई-बहनों की पढ़ाई, घर का राशन-पानी सब चलता है. मेरे पिताजी किसान हैं.’
पिता करते हैं किसानी
सावित्री बताती हैं, ‘मेरे पिताजी किसान हैं और मम्मी घर का काम संभालती हैं. ऐसे में घर की आमदनी बस उतनी ही होती थी, जितने में हम दो वक्त रोटी अच्छी तरह खा लें, इससे अधिक नहीं. मेरे दो भाई-बहन भी हैं. ऐसे में किसी ने मुझे बताया कि ऐसी एक योजना चलती है, जिसके तहत जुड़कर आपको स्किल सिखाया जाएगा. वहां से जुड़कर कई सारी चीजें आप सीख सकती हैं और सरकार आपको सहयोग भी करेगी.
मुझे लगा कि अगर यह सहयोग मिल जाए तो मैं खुद की भी पढ़ाई करूं और भाई-बहनों का भी खर्च निकाल लूंगी और आज ऐसा ही हुआ. 6 महीने की ट्रेनिंग मिली, जिसके तहत कई सारी चीजें बनाना हमने सीखा. जैसे बांस का बैग, बांस का लैम्प, डेकोरेटिव आइटम्स, आर्टिफिशियल डेकोरेटिव आइटम्स. यह सारी चीजें आज मैं अपने हाथों से बनाती हूं.
भाई-बहन सबकी जिम्मेदारी उठाती हूं
साथ ही आज भाई-बहनों और घर की जिम्मेदारी मैं ही उठाती हूं. सबको अच्छे कॉलेज में पढ़ा रही हूं. मैं खुद रांची यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री कर रही हूं. क्लास भी हो जाती है और क्लास के बाद फिर दो से तीन घंटे बांस से कई चीजें बनाने में लग जाती हूं. ऐसे में दोनों ही काम साथ-साथ चलता है और आमदनी में महीने का आराम से 30 से 40 हजार रुपये के बीच हो जाती है. हमारे जैसे मिडिल क्लास परिवार के लिए इतना पैसा बहुत बड़ी बात है.’
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