रांचीः मोटापा और डायबिटीज जैसी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए झारखंड का पारंपरिक ‘रेड राइस’ (लाल चावल) एक संजीवनी बनकर उभरा है. अक्सर वजन घटाने के लिए लोग चावल का त्याग कर देते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि रेड राइस को डाइट में शामिल कर स्वाद और सेहत दोनों को बरकरार रखा जा सकता है. रांची रिम्स के डॉ. जेके मित्रा के अनुसार, यह चावल पूरी तरह से ग्लूटेन-फ्री है और इसमें फाइबर की उच्च मात्रा पाई जाती है, जो पाचन को बेहतर बनाकर लंबे समय तक पेट भरा होने का अहसास कराती है. इसकी सबसे बड़ी खूबी इसकी कम कैलोरी है; जहां 100 ग्राम रेड राइस में मात्र 50 कैलोरी होती है, जो वजन कम करने में बेहद कारगर है. स्थानीय स्तर पर आदिवासियों की पहली पसंद रहा यह चावल अब शहरी बाजारों में भी अपनी जगह बना रहा है. इसे बनाने की विधि भी सरल है. खौलते पानी में पकाकर मांड अलग करने के बाद यह हल्का चिपचिपा और लाल रंग का हो जाता है. यह न केवल मोटापे को नियंत्रित करता है, बल्कि ब्लड शुगर लेवल को स्थिर रख डायबिटीज मरीजों के लिए भी एक सुरक्षित और स्वादिष्ट विकल्प प्रदान करता है.
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