झारखंड में बीते 24 घंटों में अचानक सियासी हलचल देखने को मिली है. पहले खबर आई कि हेमंत सोरेन की बीजेपी से बातचीत चल रही है. जेएमएम ने तुरंत इसका खंडन किया. लेकिन अगले ही पल झारखंड के राज्यपाल दिल्ली पहुंच गए. जब बीजेपी के नेताओं से इस बारे में बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने चुप्पी साध ली. ऐसे में अटकलों को बल मिल रहा है.
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन.
रांची/नई दिल्ली: झारखंड की राजनीति में पिछले 24 घंटों में जो कुछ हुआ है, उसने रांची से लेकर दिल्ली तक सियासी पारा चढ़ा दिया है. कल दोपहर तक जो महज एक ‘अफवाह’ लग रही थी, शाम होते-होते वो एक ‘संभावना’ में बदल गई. कहानी शुरू हुई सूत्रों के इस दावे से कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन दिल्ली में हैं और बीजेपी आलाकमान के संपर्क में हैं. जेएमएम ने तुरंत इसका खंडन किया, लेकिन ठीक उसी वक्त झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार का दिल्ली पहुंचना और गृहमंत्री अमित शाह से मिलना-यह महज संयोग नहीं हो सकता. हालांकि, पूरे मामले पर बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने चुप्पी साध रखी है.
झारखंड में एक बार फिर सत्तारूढ़ गठबंधन में दूरियां बढ़ने से वहां पर सत्ता समीकरण में बदलाव की आशंका की खबरें तेज हो गई हैं. सत्ता समीकरण में बदलाव का मतलब झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस के बजाय झारखंड मुक्ति मोर्चा और बीजेपी गठजोड़ की आशंका…इस बढ़ती दूरियों ने सत्ता समीकरण में बदलाव की आशंका को बल दिया है. हालांकि BJP शीर्ष नेतृत्व ऐसी किसी भी अटकलों पर अभी तक चुप्पी साधे हुए हैं और कोई भी प्रतिक्रिया उनकी ओर से नहीं मिली है. लेकिन जिस तरीके से बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी को जीत मिली है, उसके बाद झारखंड में बीजेपी जेएमएम की नजदीकियों को बल मिल गया है. इस बीच एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम हुआ. जब मंगलवार शाम झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार दिल्ली पहुंचे और गृह मंत्री अमित शाह से औपचारिक मुलाकात की. हालांकि इस मुलाकात को राज्य में मौजूदा समय में उत्पन्न हुई राजनीतिक हलचल से जोड़कर नहीं देखा जा सकता. क्योंकि इस पर अब तक कोई बयान नहीं आया. लेकिन सियासत में वक्त काफी मायने रखता है.
राज्य में एकाएक इस बदले सत्ता समीकरण के संभावना की कुछ प्रमुख वजहें
पिछले कई दिनों से कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा के नेताओं का झारखंड में एक साथ सार्वजनिक मंच पर न दिखना.
बिहार विधानसभा चुनाव में झामुमो को महागठबंधन समझौते के तहत सीट न मिलना और उसका चुनाव में वहां हिस्सा ना लेना.
झारखंड में ‘मैया सम्मान योजना’ और भी अलग-अलग योजनाएं जो चल रही हैं उनके लिए केन्द्र से सहायता राशि लेना.
प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व की ओर से विरोधाभासी बयान देना, यह सबकुछ कुछ खटपट की ओर इशारा तो जरूर कर रहा था.
मुख्यमंत्री का सरकार आपके द्वार कार्यक्रम में उपस्थित नहीं होना और कार्यक्रम कैंसल होना.
दुमका में फ्लाइंग इंस्टिट्यूट के कार्यक्रम में आरजेडी और कांग्रेस के मंत्री का मौजूद न होना.
मोराबादी मैदान में न्युक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम के पोस्टर से आरजेडी और कांग्रेस के नेता का पोस्टर गायब.
पोस्टर नहीं लगने के बाद कांग्रेस और आरजेडी के कुछ नेताओं के बीच ये चर्चा का विषय.