वहीं, बगल से ही गुजर रहे सुशील कुमार कहते हैं कि ‘यह तो पूरा का पूरा ही निराधार बात है. आप कैसे बोल सकते हैं कि प्रति व्यक्ति आय एक लाख पार हो गई है. चलिए मेरे साथ आपको आंखों के सामने ऐसे गरीब दिखा देंगे. जो खाने के लिए तरस रहे हैं. यह आंकड़ों का खेल है. इन्होंने कैलकुलेट कर लिया है, लेकिन जिंदगी कैलकुलेट करने से नहीं चलती है. एक व्यक्ति सालाना 50 लाख कमा रहा है और एक व्यक्ति 10,000 कम रहा है. ऐसे में आप जब कैलकुलेट करते हैं तो एवरेज निकालते हैं, लेकिन एवरेज में सच्चाई सामने निकल कर नहीं आती है.
लोगों के पास नहीं है राशन खरीदने का पैसा
वहीं, प्रवीण बताते हैं कि उन्होंने एवरेज निकालकर सारी बातें बता दी, यह गलत है. प्रत्येक व्यक्ति की बात करते हैं तो अंतिम छोर पर बैठा हुआ व्यक्ति भी आ जाता है. हमारे आंखों के सामने ऐसे कई लोग हैं, जिनके पास राशन खरीदने के पैसे नहीं हैं. सरकार के राशन पर निर्भर हैं. एक लाख तो छोड़िए सालाना 50,000 भी नहीं है. हकीकत नहीं देख रहे हैं. बस सदन में और दुनिया के सामने पेश करना है तो बोल देना है, बोलने से कुछ नहीं होगा.
कौन सा कैलकुलेशन किये है मंत्री जी, हमको भी बताएं
वहीं, बगल में ही खड़े आशीष बताते हैं कि यह एक ऐसा स्टेटमेंट है, जिस पर कोई भी यकीन नहीं करेगा. मैं आप या कोई भी नहीं. क्योंकि सच्चाई कुछ और है. हर दिन अपने आंखों के सामने कुछ ऐसे लोगों को देखते हैं, जिनके पास खाने और रहने के लिए भी कुछ भी नहीं है. फिर हम कैसे मान लें कि सालाना ₹1 लाख हर व्यक्ति कमा रहा है. यह सारा सर झूठ है और सरकार को इस पर ध्यान देने की जरूरत है.
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