दरअसल बीचक्राफ्ट C90 (VT-AJV) रांची से दिल्ली के लिए एयर एंबुलेंस सर्विस के तौर पर ऑपरेट हो रहा था. टेक-ऑफ के कुछ ही मिनटों बाद पायलट इस विमान को 6,000 फीट की ऊंचाई तक ले गए, लेकिन खराब मौसम के चलते कोलकाता एयर ट्रैफिक कंट्रोल से रूट बदलने (डिविएशन) की इजाजत मांगी. इसी बातचीत के कुछ समय बाद विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया.
विमान के उड़ान भरने के समय रांची में मौसम बेहद खराब था. इलाके में 3,000 फीट की ऊंचाई तक क्यूम्यूलोनिंबस बादल छाए हुए थे, जो उड़ान के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण माने जाते हैं.
एयर एंबुलेंस से पहले उड़े थे इंडिगो और एयर इंडिया के विमान
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि एयर एंबुलेंस के हादसे से करीब आठ मिनट पहले इंडिगो की एक फ्लाइट ने रांची से उड़ान भरी थी. इसी दौरान एयर इंडिया का एक विमान भी रांची से रवाना हुआ और कठिन मौसम के बावजूद सुरक्षित अपने गंतव्य की ओर बढ़ गया. वहीं टेक-ऑफ के कुछ ही मिनट बाद, जब विमान रांची एयरपोर्ट से करीब 37 किलोमीटर दूर था, तब पायलटों ने खराब मौसम से बचने के लिए दाईं ओर मुड़ने की अनुमति मांगी.
छोटा विमान, बड़ी चुनौती
जहां बड़े कमर्शियल विमान तूफानी हालात से निपटने में सफल रहे, वहीं अपेक्षाकृत छोटा विमान बीचक्राफ्ट C90 टेक-ऑफ के कुछ ही मिनटों में दुर्घटनाग्रस्त हो गया. बताया जा रहा है कि एयर एंबुलेंस अन्य विमानों के उड़ान भरने के लगभग आठ मिनट बाद क्रैश हुई.
इस एयर एंबुलेंस में संजय कुमार नाम के मरीज को दिल्ली ले जाया जा रहा था. 41 वर्षीय संजय झारखंड के लातेहार जिले के चंदवा के रहने वाले थे. वह पेशे से ढाबा चलाते थे, और वहां लगी आग में उनका शरीर 65 प्रतिशत जल गया था.
अखबार के मुताबिक, रांची के देवकमल अस्पताल के सीईओ अनंत सिन्हा ने बताया, ‘संजय कुमार को 16 फरवरी को 65 प्रतिशत बर्न इंजरी के साथ अस्पताल लाया गया था और यहीं इलाज चल रहा था. हालत गंभीर होने पर परिजनों ने उन्हें उन्नत इलाज के लिए दिल्ली ले जाने का फैसला किया. सोमवार को एयर एंबुलेंस की व्यवस्था की गई और मरीज को शाम करीब 4:30 बजे अस्पताल से रवाना किया गया.’
अब जांच एजेंसियां यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि जब उसी समय दो कमर्शियल फ्लाइट्स सुरक्षित उड़ान भर सकीं, तो एयर एंबुलेंस क्यों हादसे का शिकार हुई. मौसम, विमान की क्षमता, पायलट के फैसले और एयर ट्रैफिक कंट्रोल से हुए संवाद सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है.
यह हादसा एक बार फिर खराब मौसम में छोटे विमानों की उड़ान और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े करता है.
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