सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में राजकोषीय घाटा 2.3 प्रतिशत तक सीमित रखने का लक्ष्य निर्धारित किया है. साथ ही स्थापना और योजना के अनुपात में अंतर को भी रेखांकित किया गया है. बजट में पूंजीगत व्यय में 8.7 प्रतिशत की वृद्धि का प्रावधान किया गया है, जिससे आधारभूत संरचना और विकास परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है.
झारखंड बजट
रांची: झारखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट पेश कर रही है. राज्य के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने विधानसभा में बजट पेश करते हुए कहा कि यह बजट गरीबों के आंसू पोंछने और उनके चेहरे पर मुस्कान लाने वाला होगा. वित्त मंत्री ने वरिष्ठ नेता शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि यह उनके संसदीय जीवन का दूसरा बजट है, लेकिन इस अवसर पर शिबू सोरेन जी की कमी स्पष्ट रूप से महसूस हो रही है. अब आइए जानते हैं झारखंड सरकार के बजट 2026-27 की प्रमुख बातें..
सरकार ने चालू वित्तीय वर्ष में राजकोषीय घाटा 2.3 प्रतिशत तक सीमित रखने का लक्ष्य निर्धारित किया है. साथ ही स्थापना और योजना के अनुपात में अंतर को भी रेखांकित किया गया है. बजट में पूंजीगत व्यय में 8.7 प्रतिशत की वृद्धि का प्रावधान किया गया है, जिससे आधारभूत संरचना और विकास परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है. सरकार के अनुसार, वर्तमान में राज्य सरकार के पास लगभग 78 हजार करोड़ रुपये उपलब्ध हैं. हालांकि, विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं पर बड़ी राशि व्यय हो रही है, जिसमें मैया सम्मान योजना प्रमुख है.
सरकार ने यह भी उल्लेख किया कि मुख्यमंत्री की दावोस में आयोजित World Economic Forum की बैठक में भागीदारी से झारखंड को औद्योगिक निवेश के क्षेत्र में बढ़ावा मिल रहा है. मुख्यमंत्री और ग्रामीण विकास मंत्री को ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने तथा पेसा कानून लागू करने के लिए बधाई दी गई.
शिक्षा के क्षेत्र में पांच नए बालिका आवासीय विद्यालयों के निर्माण की घोषणा की गई है. वहीं कृषि क्षेत्र में महिलाओं की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ करने के उद्देश्य से ‘महिला खुशहाली योजना’ शुरू की गई है’.
बजट भाषण में केंद्र सरकार से अपेक्षित आर्थिक सहयोग का मुद्दा भी उठाया गया. सरकार का कहना है कि राज्य को केंद्रांश के रूप में 11 हजार करोड़ रुपये की आवश्यकता है, जबकि अब तक केवल 5 हजार करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए हैं. जीएसटी व्यवस्था के कारण राज्य को लगभग 4 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, जिससे वित्तीय दबाव बढ़ा है. इसके अलावा, केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन से राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी पड़ा है.
इन चुनौतियों के बावजूद सरकार ने स्पष्ट किया कि किसी भी कर्मचारी का वेतन नहीं रोका गया है. सरकार का दावा है कि वित्तीय दबाव के बीच भी विकास और जनकल्याण की योजनाओं को निरंतर आगे बढ़ाया जा रहा है.
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Amita kishorन्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें