Animal Husbandry Yojana: डॉ ओग्रेय ने लोकल 18 को बताया कि किसान इस योजना का लाभ दो तरीकों से ले सकते हैं, पहला- बैंक लोन के माध्यम से और दूसरा- स्ववित्तीय यानी अपने स्वयं के निवेश से. दोनों ही स्थितियों में किसानों के लिए आवेदन करना अनिवार्य है.
इस संबंध में जांजगीर-चांपा जिला पशु विकास विभाग के वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ एस एल ओग्रेय ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान समय में गाय-भैंस पालन के लिए सबसे महत्वपूर्ण योजना राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना है. इस योजना के तहत किसान भाइयों को दो गाय या दो भैंस उपलब्ध कराई जाती हैं, जो उन्नत दुधारू नस्ल की होती हैं. उन्होंने बताया कि योजना के मानदंडों के अनुसार दुधारू पशु की उम्र 5 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए और उसका दैनिक दूध उत्पादन 10 लीटर या उससे अधिक होना आवश्यक है. ऐसे मानक वाले पशु ही किसानों को योजना के अंतर्गत उपलब्ध कराए जाते हैं.
योजना का दो तरीकों से लाभ
डॉ ओग्रेय ने बताया कि किसान भाई इस योजना का लाभ दो तरीकों से ले सकते हैं, पहला- बैंक ऋण के माध्यम से और दूसरा- स्ववित्तीय (अपने स्वयं के निवेश से). दोनों ही स्थितियों में किसानों को आवेदन करना अनिवार्य होता है. आवेदन प्रक्रिया की जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि किसान को सामान्य आवेदन पत्र के साथ अपनी भूमि का बी-1 खसरा, आधार कार्ड और बैंक खाते की फोटोकॉपी संलग्न करनी होती है. यदि किसान बैंक ऋण के माध्यम से योजना का लाभ लेना चाहता है, तो आवेदन को संबंधित बैंक को भेजा जाता है. बैंक द्वारा ऋण स्वीकृत होने के बाद किसान उस राशि से गाय या भैंस खरीद सकता है.
पशुओं का बीमा कराना अनिवार्य
वहीं यदि किसान स्ववित्तीय रूप से योजना का लाभ लेना चाहता है, तो आवेदन को जनपद और जिला स्तर से अनुमोदित कराने के बाद किसान को स्वीकृति आदेश जारी किया जाता है. इसके बाद किसान अपने स्वयं के पैसे से दुधारू गाय या भैंस खरीदता है. पशु खरीदने के बाद उसका बीमा कराना अनिवार्य होता है. बीमा के दस्तावेज जमा करने के बाद ही सब्सिडी की प्रक्रिया पूरी की जाती है. सब्सिडी की जानकारी देते हुए डॉ ओग्रेय ने आगे बताया कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के किसानों को 66 प्रतिशत तक जबकि सामान्य एवं पिछड़ा वर्ग के किसानों को 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है. कुल योजना राशि 1,40,000 रुपये है, जिसमें सामान्य एवं पिछड़ा वर्ग के किसान लगभग 70,000 रुपये तक जबकि SC/ST वर्ग के किसान लगभग 93,000 रुपये तक की सब्सिडी के पात्र होते हैं.
पशु अस्पताल में जमा करें आवेदन
उन्होंने बताया कि इस योजना के माध्यम से किसान दो गाय या भैंस लेकर अपने घर पर दूध उत्पादन बढ़ा सकते हैं और इसे आय का एक स्थायी स्रोत बना सकते हैं. आवेदन किसान किसी भी नजदीकी पशु अस्पताल में जमा कर सकते हैं, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाती है. पात्रता के संबंध में उन्होंने स्पष्ट किया कि यह योजना नए किसानों के लिए है, जो डेयरी व्यवसाय की शुरुआत करना चाहते हैं, पहले से स्थापित डेयरी किसानों को इस योजना का लाभ नहीं दिया जाता. इस योजना के माध्यम से राज्य सरकार किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है.
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राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
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