Agriculture News: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले स्थित ग्राम मोखला में राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत प्राकृतिक खेती अपनाकर बुजुर्ग कृषक दंपती मनभौतिन बाई निषाद और माखन निषाद ने सफलता की मिसाल पेश की है. रसायन मुक्त खेती से लागत घटी, उपज की गुणवत्ता बढ़ी और आय में शानदार सुधार हुआ है.
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत वर्ष 2025 में विकसित क्लस्टर में ग्राम मोखला के प्रगति महिला स्वसहायता समूह के सदस्यों को जीवामृत, बीजामृत, घनजीवामृत और दशपर्णी अर्क बनाने का प्रशिक्षण दिया गया. इसी प्रशिक्षण में मनभौतिन बाई निषाद और माखन निषाद ने भाग लेकर प्राकृतिक खेती की बारीकियां सीखी.

शिवनाथ नदी के तट पर स्थित 2.34 एकड़ भूमि में यह कृषक दंपती अब पूरी तरह रसायन मुक्त खेती कर रहा है. पहले जहां रासायनिक खेती की जाती थी, वहीं अब प्राकृतिक पद्धति से सब्जियां, तिवड़ा, मसूर और सरसों जैसी फसलें लहलहा रहा हैं.

देशी गाय के गोबर, गौमूत्र, मिट्टी और स्थानीय पत्तियों से जीवामृत एवं घनजीवामृत तैयार किया जा रहा है. इससे न केवल खेती की लागत घटी है, बल्कि मिट्टी की उर्वरता और लाभदायक सूक्ष्म जीवों की संख्या में भी वृद्धि हुई है.
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प्राकृतिक खेती से उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार होने के कारण अब व्यापारी सीधे खेत तक पहुंचकर उपज खरीद रहे हैं. जैविक उत्पादों को बाजार में बेहतर मूल्य मिलने से कृषक दंपती की आय में पहले की तुलना में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है.

जहां पहले सालाना आय 50 से 60 हजार रुपये तक सीमित थी, वहीं प्राकृतिक खेती अपनाने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है. स्वास्थ्य, पर्यावरण और आय तीनों स्तर पर लाभ मिलने से यह दंपती अब अन्य किसानों को भी प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है.
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