लखेश्वर बघेल बस्तर क्षेत्र के एक प्रमुख आदिवासी चेहरा हैं, जिन्हें स्थानीय स्तर पर ‘लखू भैया’ के नाम से जाना जाता है. उन्होंने लगातार तीसरी बार बस्तर (एसटी) विधानसभा सीट से जीत हासिल की है और कांग्रेस के लिए आदिवासी बहुल इलाकों में मजबूत आधार बनाए रखा है. उनकी नियुक्ति से पार्टी को बस्तर जैसे संवेदनशील क्षेत्र की आवाज सदन में मजबूती से उठाने का मौका मिलेगा, जहां माओवाद, विकास की कमी और आदिवासी अधिकार जैसे मुद्दे प्रमुख हैं. यह फैसला कांग्रेस हाईकमान द्वारा विपक्षी एकता और क्षेत्रीय संतुलन को मजबूत करने की कोशिश का हिस्सा लगता है, जिससे सदन की कार्यवाही में नई ऊर्जा आएगी.
लखेश्वर बघेल का राजनीतिक सफर
लखेश्वर बघेल का जन्म 1 जुलाई 1959 को बस्तर जिले के गिरोला गांव में हुआ. उन्होंने बीए की डिग्री हासिल की और शुरुआत में सामाजिक कार्य से जुड़े. 2000-2005 तक वे बस्तर जिला पंचायत के अध्यक्ष रहे, जहां आदिवासी विकास पर फोकस किया. वे बस्तर जन जागरण नवयुवक मंडल और आदिवासी विकास परिषद जैसे संगठनों में सक्रिय सदस्य रहे. 2005 से 2018 तक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधि और उपाध्यक्ष भी रहे. 2013 में पहली बार बस्तर
विधानसभा से विधायक चुने गए, 2018 और 2023 में लगातार जीत दर्ज की.
विधानसभा में योगदान और उपलब्धियां
विधानसभा में लखेश्वर बघेल ने विभिन्न समितियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वे सरकारी उपक्रमों, प्राक्कलन, लोक लेखा, विशेषाधिकार और अन्य समितियों के सदस्य रहे. 2019-2021 तक सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति के अध्यक्ष भी रहे. 2020 में बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष बने. उन्हें विधानसभा में उत्कृष्ट विधायक के रूप में सम्मानित किया गया है, जहां राज्यपाल रामेन डेका ने उनकी सक्रियता की सराहना की. वे आदिवासी मुद्दों, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर लगातार आवाज उठाते रहे हैं.
उपनेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी और महत्व
उपनेता प्रतिपक्ष के रूप में लखेश्वर बघेल अब नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के साथ मिलकर सदन में विपक्ष की रणनीति तैयार करेंगे. यह पद लंबे समय से खाली था, और उनकी नियुक्ति से आदिवासी बहुल क्षेत्रों के मुद्दे जैसे भूमि अधिकार, वन नीति, नक्सलवाद प्रभावित इलाकों का विकास और बजट में आदिवासी कल्याण पर विशेष जोर मिलेगा. बजट सत्र में वे सरकार के विकास दावों पर सवाल उठा सकते हैं, खासकर बस्तर में बुनियादी सुविधाओं की कमी पर उनका फोकस हो सकता है.
लखू भैया स्थानीय स्तर पर लोकप्रिय, पार्टी की छवि सुधारेंगे
लखेश्वर बघेल की नियुक्ति कांग्रेस को आदिवासी वोट बैंक मजबूत करने में मदद करेगी, जहां भाजपा का प्रभाव बढ़ रहा है. ‘लखू भैया’ के रूप में लोकप्रिय होने से वे स्थानीय स्तर पर पार्टी की छवि सुधार सकते हैं. यह फैसला कांग्रेस के भीतर संतुलन बनाने की कोशिश है, जहां बस्तर जैसे क्षेत्र से मजबूत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया गया. आने वाले समय में वे विपक्ष की प्रमुख आवाज बन सकते हैं, जो 2028 के चुनावों में पार्टी के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है.
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